भिंड अस्पताल हादसा: मासूमों को दूध पिला रही माताओं पर गिरी छत, मची चीख-पुकार

भिंड जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में छत गिरने से तीन महिलाएं और एक नवजात घायल हो गए, जिससे पूरे अस्पताल में दहशत का माहौल है। हादसे के वक्त कमरे में सात महिलाएं बच्चों को दूध पिला रही थीं, दो माताओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें ट्रामा सेंटर रेफर किया गया है। अस्पताल की बिल्डिंग काफी पुरानी और जर्जर है, जिसके बाद प्रशासन ने अब पूरी इमारत की सुरक्षा जांच और ऑडिट के आदेश दिए हैं।

Mp news: मध्य प्रदेश के भिंड जिला अस्पताल में रविवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया, जहां अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग जवाब दे गई। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी एसएनसीयू वार्ड के दुग्धपान कक्ष की छत और फॉल्स सीलिंग अचानक भरभराकर गिर पड़ी। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय कमरे में सात महिलाएं अपने कलेजे के टुकड़ों को दूध पिला रही थीं। अचानक तेज आवाज के साथ मलबा गिरते ही वार्ड में चीख-पुकार मच गई और मांएं अपने बच्चों को सीने से चिपकाकर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं। इस हादसे में तीन महिलाएं और एक नवजात बच्चा घायल हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

दो महिलाओं की हालत नाजुक

हादसे में घायल ममता पवैया और सुषमा नरवरिया को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज फिलहाल ट्रामा सेंटर में चल रहा है। एक अन्य महिला को मामूली चोट लगी है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना के फौरन बाद अस्पताल स्टाफ ने सक्रियता दिखाते हुए वार्ड में मौजूद अन्य नवजात बच्चों और महिलाओं को दूसरे सुरक्षित वार्ड में शिफ्ट कर दिया ताकि किसी और अनहोनी को टाला जा सके।

Mp news: मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

हादसे की खबर मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. आर.एन. राजौरिया और एसडीएम अखिलेश शर्मा ने अस्पताल का दौरा किया। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और घायल महिलाओं का हालचाल जाना। एसडीएम ने बताया कि वार्ड की जर्जर स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को तुरंत सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने और वार्ड को खाली कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

Mp news: जर्जर बिल्डिंग से मरीजों की जान को खतरा

बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल की यह बिल्डिंग आजादी के पहले की बनी हुई है और काफी पुरानी हो चुकी है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि बीच-बीच में मरम्मत का काम होता रहता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसकी छतें और दीवारें अब बेहद कमजोर हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी प्लास्टर गिरने की घटनाएं हुई हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

पूरी बिल्डिंग की होगी सुरक्षा जांच

Mp news: एसडीएम अखिलेश शर्मा ने माना कि अस्पताल की इमारत करीब 60 से 70 साल पुरानी है, इसलिए अब इसकी विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट कराई जाएगी। प्रशासन ने आदेश दिए हैं कि अस्पताल के हर हिस्से की बारीकी से जांच हो और जहां भी खतरा दिखे, वहां तुरंत मरम्मत करवाई जाए या उसे बंद किया जाए। इस हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों में अपनी सुरक्षा को लेकर गहरा डर बैठ गया है।

 

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