पानीहाटी में ‘इंसाफ’ की जीत, आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने बनाई 20 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त
पानीहाटी सीट पर बीजेपी की रत्ना देबनाथ ने दर्ज की ऐतिहासिक बढ़त, 20 हजार से अधिक वोटों से टीएमसी को पछाड़ा। आरजी कर पीड़िता की मां का संघर्ष लाया रंग, चुनावी नतीजों को लोगों ने बताया 'न्याय के लिए जनादेश'। भावुक हुईं रत्ना देबनाथ, बोलीं विधायक बनना मकसद नहीं, बेटी को इंसाफ दिलाना ही जीवन की असली लड़ाई।

West bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बीजेपी को बड़ी बढ़त मिलती दिख रही है और पार्टी 200 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। इसी बीच उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी सीट से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया है। यहां से बीजेपी की उम्मीदवार रत्ना देबनाथ अपनी जीत की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।
पानीहाटी से रत्ना देबनाथ की मजबूत बढ़त
ताजा आंकड़ों के मुताबिक पानीहाटी विधानसभा सीट पर रत्ना देबनाथ ने अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी और टीएमसी उम्मीदवार तीर्थांकर घोष पर 20,463 वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है। शाम तक आए इन रुझानों के बाद पानीहाटी में बीजेपी समर्थकों के बीच जश्न का माहौल है और रत्ना की जीत अब लगभग तय मानी जा रही है।
West bengal: बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई बनी चुनावी मुद्दा
रत्ना देबनाथ की इस बढ़त के पीछे एक गहरा दर्द और लंबा संघर्ष छिपा है। वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज की उस डॉक्टर की मां हैं, जो दरिंदगी और हत्या का शिकार हुई थी। उस दिल दहला देने वाली घटना के बाद रत्ना ने न्याय के लिए सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। अब चुनावी मैदान में उनकी इस मौजूदगी को जनता ने एक मां के संघर्ष के प्रति समर्थन के तौर पर देखा है।
West bengal: जीत के बीच आंखों में दिखे आंसू
मतगणना केंद्र से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उनमें रत्ना देबनाथ के चेहरे पर मिली-जुली भावनाएं देखी जा सकती हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने जीत का संकेत तो दिया, लेकिन उनकी आंखों में अपनी बेटी को खोने का गम साफ झलक रहा था। उनके समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं है, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ एक मां की जीत है जिसने उन्हें न्याय के लिए भटकने पर मजबूर किया।
“मेरी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई”
अपनी बढ़त पर प्रतिक्रिया देते हुए रत्ना देबनाथ ने बेहद भावुक कर देने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी सिर्फ उनकी नहीं बल्कि पूरे बंगाल और देश की बेटी थी। रत्ना के मुताबिक विधायक बनना उनकी मंजिल नहीं है, बल्कि उनका असल मकसद अपनी बेटी को अंतिम न्याय दिलाना है। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक वह जिंदा हैं, महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के लिए उनकी आवाज गूंजती रहेगी।
क्या है आगे की तस्वीर?
West bengal: अगर रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो रत्ना देबनाथ पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघेंगी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि पानीहाटी की यह सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है। रत्ना की जीत न केवल बीजेपी के लिए एक सीट का इजाफा करेगी, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला सुरक्षा के मुद्दे को एक नई धार भी देगी।
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