दिल्ली आबकारी केस: केजरीवाल के हलफनामे पर CBI का कड़ा एतराज, कोर्ट की साख पर उठाए सवाल

CBI ने कहा- हलफनामा न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश जजों के खिलाफ माहौल बनाने पर जताई गंभीर चिंता दिल्ली हाई कोर्ट में मामला, फैसला सुरक्षित

Arvind kejriwal: दिल्ली आबकारी नीति मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अरविंद केजरीवाल के नए हलफनामे पर कड़ा एतराज जताया है। एजेंसी ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि यह हलफनामा न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने और अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश जैसा है। CBI के मुताबिक, इस तरह के कदम न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकते हैं।

 

CBI की दलीलें

CBI ने अपनी लिखित दलीलों में कहा कि अगर ऐसे हलफनामों को अनुमति दी जाती है, तो अदालतों की साख पर गंभीर असर पड़ेगा। एजेंसी ने केजरीवाल और अन्य लोगों के इस रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि जजों को बदनाम करना या उन्हें दबाव में लाने की कोशिश करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

 

Arvind kejriwal: कोर्ट की साख पर खतरा

एजेंसी ने यह भी कहा कि अगर इस तरह की प्रवृत्ति को नहीं रोका गया, तो कोई भी व्यक्ति ट्रायल कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कहीं भी जजों पर आरोप लगाने लगेगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और कोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगेंगे।

Arvind kejriwal:  सोशल मीडिया पर चिंता

CBI ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। एजेंसी के अनुसार, जजों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जो एक खतरनाक ट्रेंड बन सकता है। इससे संस्थागत अखंडता को नुकसान पहुंच सकता है और लोग केस जीतने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाने लगेंगे।

 

मामला क्या है

Arvind kejriwal: फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल की अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। बता दें कि केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ रीक्यूजल की मांग करते हुए अतिरिक्त हलफनामा दायर किया है, जिसमें जज के परिवार और तुषार मेहता से जुड़े संभावित हितों के टकराव का मुद्दा उठाया गया है।

 

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