मार्च 2026 में थोक महंगाई 3.88% पहुंची, तीन महीने से लगातार बढ़ रही कीमतें
तीन महीनों से लगातार बढ़ रही WPI ने बढ़ाई चिंता कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों ने डाला सबसे ज्यादा दबाव आने वाले समय में आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है असर

Buisness: देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की जेब पर असर डालने लगी है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 3.88% पहुंच गई है। फरवरी में यह 2.13% और जनवरी में 1.68% थी। लगातार तीन महीनों से हो रही बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में कीमतों का दबाव और बढ़ सकता है।
तेजी से बढ़ रही महंगाई
मार्च के आंकड़े साफ बताते हैं कि महंगाई अब रफ्तार पकड़ चुकी है। जनवरी से लेकर मार्च तक WPI लगातार ऊपर गया है। सिर्फ सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि महीने-दर-महीने भी 1.64% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि बाजार में चीजों की लागत तेजी से बढ़ रही है।
Buisness: कच्चा तेल और ईंधन बने बड़ी वजह
महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और ईंधन की कीमतों में उछाल है। फ्यूल और पावर सेक्टर में 1.05% की महंगाई दर्ज की गई है, जबकि पहले इसमें गिरावट थी। वहीं महीने के आधार पर इस सेक्टर में 4.13% की तेजी आई है। साफ है कि ग्लोबल मार्केट में बढ़ती ऊर्जा कीमतों का असर भारत पर भी पड़ रहा है।
Buisness: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बढ़ा दबाव
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई का असर साफ दिख रहा है। यहां महंगाई दर 3.39% तक पहुंच गई है। फूड प्रोडक्ट्स, केमिकल्स, मेटल और टेक्सटाइल जैसे कई सेक्टर में कीमतें बढ़ी हैं। 22 में से 16 सेक्टर में दाम बढ़ना इस बात का संकेत है कि इंडस्ट्री की लागत बढ़ रही है।
प्राइमरी आर्टिकल्स में तेज उछाल
कच्चे उत्पादों यानी प्राइमरी आर्टिकल्स में महंगाई 6.36% तक पहुंच गई है। इसमें कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों का बड़ा रोल है। हालांकि कुछ खाने-पीने की चीजों में हल्की राहत जरूर मिली है, लेकिन कुल मिलाकर इस कैटेगरी में महंगाई अभी भी ऊंची बनी हुई है।
खाने-पीने की चीजों में थोड़ी राहत
थोक महंगाई बढ़ने के बीच एक राहत की बात यह है कि फूड इंडेक्स ज्यादा नहीं बढ़ा है। मार्च में यह 1.85% पर स्थिर रहा, जिससे संकेत मिलता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं हुआ।
आगे क्या होगा?
Buisness: एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो महंगाई और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि थोक महंगाई धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचती है।
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