केजरीवाल का नया हलफनामा: जज पर ‘हितों के टकराव’ का आरोप, कोर्ट में उठाए बच्चों के प्रोफेशनल लिंक

केजरीवाल ने जज के परिवार और सरकार के लिंक पर उठाए सवाल CBI केस में सॉलिसिटर जनरल की भूमिका को बताया टकराव रिक्यूजल की मांग तेज, सुनवाई प्रक्रिया पर भी आपत्ति

Arvind kejriwal: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने बुधवार को जस्टिस Swarnkanta Sharma के खिलाफ एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर मामले को और गंभीर बना दिया है। इस हलफनामे में उन्होंने दावा किया है कि जज के दोनों बच्चे केंद्र सरकार से जुड़े पैनल काउंसल हैं और उन्हें काम आवंटित करने की प्रक्रिया में Tushar Mehta की भूमिका रहती है, जो इस केस में CBI की ओर से पेश हो रहे हैं।

 

सरकारी पैनल से जुड़े बच्चों का जिक्र

केजरीवाल ने अपने हलफनामे में कहा कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी दोनों ही केंद्र सरकार के लीगल पैनल में शामिल हैं। उन्होंने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि यह सिर्फ औपचारिक पद नहीं हैं, बल्कि इनमें सरकारी केस, पेशी और आर्थिक लाभ भी शामिल होते हैं। उनका दावा है कि इन नियुक्तियों के कारण जज और केंद्र सरकार के बीच एक पेशेवर संबंध बनता है।

 

Arvind kejriwal: तुषार मेहता की भूमिका पर सवाल

हलफनामे में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य मामलों में पैनल वकीलों को केस आवंटित करने में सॉलिसिटर जनरल की अहम भूमिका होती है। केजरीवाल ने कहा कि चूंकि Central Bureau of Investigation की ओर से इस केस में Tushar Mehta पेश हो रहे हैं, इसलिए यह स्थिति “हितों के टकराव” (Conflict of Interest) का संकेत देती है।

Arvind kejriwal:  ‘निष्पक्षता पर उठता है सवाल’

केजरीवाल ने कहा कि वह जज पर किसी तरह के व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन इन परिस्थितियों में एक निष्पक्ष व्यक्ति को भी न्यायिक प्रक्रिया पर संदेह हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, जहां केंद्र सरकार की एजेंसी उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है, इसलिए “न्याय होता हुआ दिखना भी जरूरी है।”

 

सुनवाई प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

अपने हलफनामे में केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह खुद कोर्ट में पेश होकर दलील दे रहे थे, तब उनके जाने के बाद देर शाम तक सुनवाई जारी रही और उन्हें जवाब देने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से वंचित करता है।

 

रिक्यूजल की मांग दोहराई

Arvind kejriwal: अंत में केजरीवाल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इन सभी तथ्यों को देखते हुए जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए। उनका कहना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और भरोसा दोनों बनाए रखने में मदद मिलेगी।

 

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