US–Iran Ceasefire: 15 दिन की शांति, अब इस्लामाबाद में होगी सीधी बातचीत

15 दिन के सीजफायर के बाद US–Iran आमने-सामने पाकिस्तान बना मध्यस्थ, इस्लामाबाद में होगी बड़ी बातचीत तनाव बरकरार, शर्तों पर टिकी है शांति की उम्मीद

Iran crisis: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दोनों देशों ने 15 दिनों के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है और अब 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई है।

 

तत्काल लागू हुआ सीजफायर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों ने तुरंत प्रभाव से सीजफायर लागू करने पर सहमति जताई है। उन्होंने इसे शांति की दिशा में बड़ा और समझदारी भरा कदम बताया है।

 

इस्लामाबाद में होगी अहम वार्ता

दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत होगी। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में लंबे समय से चल रहे विवादों का कूटनीतिक समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

 

ईरान का सख्त रुख बरकरार

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ कहा है कि सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है। अगर किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई हुई, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

 

ट्रंप की चेतावनी के बाद बदला रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी और हमले तेज करने की बात कही थी। लेकिन अब उन्होंने सीजफायर पर सहमति जताई है, बशर्ते ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खोलने और शांति बनाए रखने पर राजी रहे।

 

ईरान की शर्तें क्या हैं?

ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका के सामने कुछ बड़ी शर्तें रखी हैं: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही ईरान के नियंत्रण में हो, ईरान समर्थित गुटों पर सभी हमले तुरंत रोके जाएं, मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सेना की पूरी वापसी हो, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा अमेरिका दे, ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाएं, विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस की जाएं, इन सभी बातों को संयुक्त राष्ट्र के बाध्यकारी प्रस्ताव में शामिल किया जाए।

 

निष्कर्ष

फिलहाल 15 दिनों का सीजफायर दोनों देशों को बातचीत का मौका दे रहा है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर है, जहां तय होगा कि ये अस्थायी शांति स्थायी समाधान में बदलती है या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ता है।

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