अमेरिका ने C-17 प्लेन से माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टर का सफल ट्रांसपोर्ट किया, मिलिट्री और एनर्जी में बड़ी उपलब्धि

अमेरिका ने पहली बार C-17 पर माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टर ट्रांसपोर्ट किया। रिएक्टर बिना फ्यूल के उड़ाया गया, ताकि दूर-दराज इलाकों में जल्दी इंस्टॉल हो सके। एनर्जी और डिफेंस अधिकारियों ने इसे अमेरिकी पावर और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स की बड़ी सफलता बताया।

USA news: अमेरिका ने पहली बार एक छोटा न्यूक्लियर रिएक्टर हवाई मार्ग से ट्रांसपोर्ट कर बड़ी सफलता दर्ज की है। अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट और डिफेंस डिपार्टमेंट ने कैलिफोर्निया से यूटा तक C-17 कार्गो प्लेन पर यह रिएक्टर ले जाया। इसे कैलिफोर्निया की कंपनी Valer Atomics ने विकसित किया है और इसे वॉर्ड माइक्रोरिएक्टर कहा जाता है। रिएक्टर को बिना न्यूक्लियर फ्यूल के उड़ाया गया ताकि इसे मिलिट्री बेस या दूर-दराज इलाकों में तेजी से इंस्टॉल किया जा सके।

 

फ्लाइट में मौजूद थे बड़े अधिकारी

रिएक्टर को मार्च एयर रिजर्व बेस (कैलिफोर्निया) से हिल एयर फोर्स बेस (यूटा) तक ले जाया गया। इसे अब यूटा के सैन राफेल एनर्जी लैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जाएगा। एनर्जी सेक्रेटरी Chris Wright और डिफेंस अंडर सेक्रेटरी Michael Duffy खुद इस फ्लाइट में मौजूद थे। दोनों ने इसे अमेरिकी न्यूक्लियर एनर्जी और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स में बड़ी उपलब्धि बताया।

 

रिएक्टर का आकार और क्षमता

यह रिएक्टर मिनीवैन से थोड़ा बड़ा है और अधिकतम 5 मेगावाट बिजली उत्पादन कर सकता है, यानी लगभग 5,000 घरों को रोशनी दे सकता है। अमेरिकी सरकार छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों को एनर्जी बढ़ाने का तरीका मानती है।

 

कंपनी और भविष्य की योजना

कंपनी के CEO Yeshayah Taylor के मुताबिक, रिएक्टर जुलाई में 100 किलोवाट से शुरू होगा, फिर 250 किलोवाट तक बढ़ेगा और बाद में पूरी क्षमता पर काम करेगा। कंपनी की उम्मीद है कि 2027 में टेस्ट बेस पर बिजली बेचना शुरू हो जाएगा और 2028 में पूरी तरह कमर्शियल हो जाएगा। एनर्जी डिपार्टमेंट की योजना है कि 4 जुलाई 2026 तक तीन माइक्रोरिएक्टर रेडी मोड में हो जाएंगे।

 

चुनौतियां और महंगाई

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि छोटे रिएक्टर महंगे पड़ सकते हैं। यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स के एडविन लाइमैन ने कहा कि इनसे बिजली की कीमत बड़े रिएक्टरों और रिन्यूएबल एनर्जी से ज्यादा होगी। न्यूक्लियर वेस्ट की समस्या भी बनी रहेगी। एनर्जी सेक्रेटरी राइट ने बताया कि वेस्ट डिस्पोजल अभी चुनौती है, लेकिन सरकार सुरक्षित रीप्रोसेसिंग या डिस्पोजल की जगह बनाने के लिए यूटा जैसे राज्यों से बातचीत कर रही है।

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