बिजनौर भूमि अधिग्रहण मामला: मुआवजा न मिलने पर डीएम के सरकारी आवास की कुर्की के आदेश
मुआवजा न मिलने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया डीएम के सरकारी आवास की कुर्की के आदेश 9 जनवरी को व्यक्तिगत पेशी का निर्देश

बिजनौर जिले से जुड़े भूमि अधिग्रहण के एक पुराने मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। मुरादाबाद स्थित भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण की अदालत ने मुआवजा भुगतान में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जिला अधिकारी जसजीत कौर के सरकारी आवास को कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के लिए तलब किया है।
मुआवजा न मिलने से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला जमीन अधिग्रहण के बदले दिए जाने वाले मुआवजे से संबंधित है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अदालत पहले ही मुआवजा देने का आदेश पारित कर चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक भुगतान नहीं किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, मामला लंबे समय से लंबित है और कई बार प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद उसे उसका हक नहीं मिल पाया।
अदालत में नहीं दी गई कोई संतोषजनक रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि डीएम कार्यालय की ओर से न तो कोई स्पष्ट जवाब दिया गया और न ही मुआवजे को लेकर कोई रिपोर्ट पेश की गई। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश और नोटिस के बावजूद भुगतान न किया जाना न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना है। याचिकाकर्ता उमेश ने अदालत के सामने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि प्रशासन से बार-बार संपर्क करने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। मजबूर होकर उसने अपने अधिकार के लिए डीएम के सरकारी आवास की कुर्की की मांग की।
कुर्की के साथ शर्तें भी तय
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने डीएम के सरकारी आवास की कुर्की का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कुर्की की अवधि के दौरान डीएम उस आवास को किसी अन्य को सौंप नहीं सकेंगी और न ही उससे किसी तरह का आर्थिक लाभ ले सकेंगी। हालांकि, प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें आवास में रहने की अनुमति दी गई है। अदालत ने कुर्क संपत्ति से जुड़े अन्य पहलुओं और आगे की शर्तों पर सुनवाई के लिए डीएम बिजनौर को 9 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद जिले में मामला चर्चा का विषय बन गया है और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।



