मौलाना महमूद मदनी का बयान: जिहाद को लेकर मीडिया और सरकार पर निशाना
जिहाद की गलत व्याख्या पर मौलाना मदनी का बयान मुसलमानों की संवैधानिक वफादारी को किया स्पष्ट 60% खामोश तबके से संवाद बढ़ाने की अपील

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में जिहाद पर दिए गए बयान को दोहराते हुए कहा कि जिहाद जैसे पवित्र शब्द को सरकार और मीडिया गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार “जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद और जमीन जिहाद जैसे शब्दों से जोड़कर बदनाम किया जा रहा है।” मदनी ने साफ कहा, “जिहाद हमेशा पवित्र था और रहेगा। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा। जहां जुल्म होगा, वहीं जिहाद होगा।”
“भारत में जिहाद बहस का मुद्दा ही नहीं” — मदनी
मदनी ने कहा कि भारत एक सेक्युलर और जम्हूरी देश है, इसलिए यहां जिहाद का मुद्दा उठाना ही गलत है। उन्होंने कहा कि मुसलमान संविधान के प्रति वफादार हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे। मदनी का बयान था, “अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसकी जिम्मेदार भी वही होगी।”
सुप्रीम कोर्ट और अल्पसंख्यक अधिकारों पर टिप्पणी
मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट वही तक “सुप्रीम” कहलाने का हकदार है जब तक वह संविधान की हिफाजत करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल के कुछ फैसले अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। मदनी ने 1991 वर्शिप एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि “इसके बावजूद ज्ञानवापी और अन्य मामलों में सुनवाई होना इसका उदाहरण है।”
मुसलमानों को लेकर देश का माहौल
मदनी के अनुसार, 10% लोग मुसलमानों के पक्ष में हैं, 30% लोग विरोध में हैं, और 60% लोग खामोश हैं। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि इन 60% खामोश लोगों से संवाद बढ़ाएं, अपनी बात समझाएं और संपर्क मजबूत करें। मदनी ने चेतावनी दी कि अगर ये खामोश तबका मुसलमानों के खिलाफ हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं।



