बड़ी खबर: यूपी में गुर्जरों की गिरफ्तारी पर भयंकर बवाल, जेल की तरफ कूंच.. सपा-भाजपा विधायक दोनों मेरठ पहुंचे!

मेरठ में दादरी महापंचायत के दौरान हुई गिरफ्तारियों ने पश्चिमी यूपी की सियासत को गरमा दिया है। गुर्जर समाज के लोगों ने 17 युवाओं की गिरफ्तारी के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। भीड़ मेरठ जेल की ओर बढ़ने लगी, लेकिन पुलिस ने चार थानों की फोर्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान समाज के नेताओं ने चेतावनी दी कि निर्दोष युवाओं की रिहाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।
सुबह 11 बजे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन
सुबह करीब 11 बजे गुर्जर समाज के लोग मेरठ में विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए। उनका आरोप था कि पुलिस ने दादरी महापंचायत के दौरान 17 लोगों को गलत तरीके से जेल भेज दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस को तुरंत उन्हें रिहा करना चाहिए। भीड़ जेल की तरफ जाने लगी, लेकिन पुलिस ने नाकाबंदी कर रोका।
जेल में बंद कैदियों ने शुरू किया आमरण अनशन
जेल में बंद 17 लोगों ने भी अपनी रिहाई की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने जेल जाकर कैदियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को जल्द से जल्द छोड़ा जाना चाहिए, वरना आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने दी प्रतिक्रिया
लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर भी मेरठ पहुंचे और एडीजी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दादरी महापंचायत में हंगामा करने वाले लोग बाहरी थे, जिनमें मुस्लिम और अन्य तत्व शामिल थे। उनका दावा है कि गुर्जर समाज कभी पुलिस पर हमला नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां प्रदेश में दंगे कराने की साजिश रच रही हैं।
क्या था पूरा मामला?
21 सितंबर को दादरी के मंडौरा में गुर्जर समाज ने महापंचायत बुलाई थी। इसमें मेरठ, सहारनपुर, नोएडा, मुजफ्फरनगर और पश्चिमी यूपी के कई जिलों से गुर्जर नेता पहुंचे थे। पंचायत में समाज के हक, टिकटों में भागीदारी और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी थी। लेकिन शुरू होते ही पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और लोगों को हिरासत में लेने लगीं।
पुलिस और भीड़ के बीच झड़प
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने लोगों को डंडों से खदेड़ा। इससे गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया और इलाके में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी। कुल 22 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 5 को छोड़ दिया गया और 17 को जेल भेज दिया गया। इसमें आसपा के राष्ट्रीय महासचिव रविंद्र भाटी भी शामिल हैं।
गुर्जर नेताओं का आरोप- समाज का उत्पीड़न
गुर्जर नेता गुरदीप गुर्जर ने आरोप लगाया कि उन्हें बंधक बनाकर टोल और जिलों में रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि जेल में बंद युवाओं से परिजनों को मिलने नहीं दिया जा रहा और सरकार समाज का उत्पीड़न कर रही है। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेताओं से सलाह लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
विपक्षी नेताओं की भी प्रतिक्रिया
सपा विधायक अतुल प्रधान ने जेल में बंद गुर्जर समाज के लोगों से मुलाकात की और कहा कि शासन-प्रशासन को जल्द ही उनकी रिहाई करनी चाहिए। वहीं विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष राजदीप विकल ने कहा कि हमारे लोगों को गंभीर धाराओं में फंसाकर जेल भेजा गया है। उन्होंने मांग की कि लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए और निर्दोष कैदियों को छोड़ा जाए।
नंदकिशोर गुर्जर का बयान: “गुर्जर और राजपूत एक जाति”
भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि “गुर्जर और राजपूत एक जाति हैं। अगर कोई ये सिद्ध कर दे कि दोनों अलग हैं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे झगड़े में न पड़ें और समाज में एकता बनाए रखें।
प्रशासन की सख्ती और आगे की तैयारी
पुलिस का कहना है कि दादरी महापंचायत बिना अनुमति के बुलाई गई थी। फिर भी प्रशासन ने पूरा सहयोग दिया। पुलिस अब उपद्रव करने वालों की पहचान कर रही है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नंदकिशोर गुर्जर ने चेतावनी दी कि ऐसे लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाएंगे जो प्रदेश में अराजकता फैलाने की साजिश कर रहे हैं।



