सनसनीखेज: यूपी में थाने में चली गोलियां, इंस्पेक्टर-सिपाही घायल, GRP पुलिस की फेयरवेल पार्टी में कांड! मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बरेली जंक्शन पर स्थित जीआरपी थाने से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां आयोजित एक फेयरवेल पार्टी के दौरान अचानक गोलियां चल गईं। इस हादसे में इंस्पेक्टर परवेज अली और एक सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और मामले को दबाने की कोशिश के बावजूद सच्चाई बाहर आ गई। फिलहाल चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच सीओ को सौंपी गई है।
कैसे हुई गोलीबारी?
जानकारी के मुताबिक, जीआरपी थाने में फेयरवेल पार्टी चल रही थी। इसी दौरान इंस्पेक्टर परवेज अली अपने साथियों को पिस्तौल लोड और अनलोड करना सिखा रहे थे। अचानक उनकी पिस्तौल से गोली चल गई, जो सिपाही के कान के पास जाकर लगी। इसके बाद दूसरा सिपाही भी हथियार संभालने की कोशिश कर रहा था कि उसकी पिस्तौल से भी गोली चल गई और यह गोली इंस्पेक्टर परवेज अली के पास जाकर लगी।
घायलों की हालत और इलाज
गोली लगते ही अफरा-तफरी मच गई। घायल इंस्पेक्टर और सिपाही को तुरंत बाइक से अस्पताल ले जाया गया। लेकिन रास्ते में हड़बड़ी के कारण दोनों बाइक से गिर भी पड़े, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई। फिलहाल दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
मामले को दबाने की कोशिश, फिर कार्रवाई
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह घटना थाने के भीतर हुई लेकिन इसे दो दिनों तक दबाकर रखा गया। हवालात में बंद आरोपियों ने बाहर आकर इस घटना की जानकारी दी, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की भनक लगी। इसके बाद आनन-फानन में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया और जांच सीओ को सौंपी गई।
जांच और कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना ने पुलिस की लापरवाही और सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि फेयरवेल पार्टी जैसे मौकों पर हथियारों का प्रदर्शन क्यों किया जा रहा था? साथ ही, मामले को दो दिन तक दबाकर रखना पुलिस विभाग की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच अधिकारी पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।



