7 साल बाद पाकिस्तान जेल से लौटा भाई, बहन के संघर्ष की जीत, अब अमृतसर में है प्रसन्नजीत
7 साल बाद पाकिस्तान जेल से भाई की रिहाई बहन के संघर्ष और उम्मीद की भावुक कहानी अमृतसर पहुंचा प्रसन्नजीत, परिवार में खुशी की लहर

Mp news: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की एक भावुक कहानी सामने आई है। यहां रहने वाली बहन संघमित्रा ने अपने भाई प्रसन्नजीत रंगारी की पाकिस्तान जेल से रिहाई के लिए करीब 7 साल तक संघर्ष किया और आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई। प्रसन्नजीत अब पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत के अमृतसर पहुंच चुका है। संघमित्रा के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। आर्थिक तंगी और कई परेशानियों के बावजूद उसने अपने भाई को वापस लाने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। अब परिवार को प्रसन्नजीत को अमृतसर से घर लाने के लिए भी सहयोग मिल गया है।
पाकिस्तान जेल में सुनील अदे के नाम से बंद था प्रसन्नजीत
दरअसल, 31 जनवरी को पाकिस्तान ने 7 भारतीय कैदियों को रिहा किया, जिसमें बालाघाट के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी भी शामिल था। वह पिछले 7 साल से पाकिस्तान की जेल में ‘सुनील अदे’ नाम से बंद था। इसकी जानकारी 1 फरवरी को खैरलांजी पुलिस के जरिए परिवार को मिली। इसके बाद घर में खुशियों का माहौल बन गया। वहीं अमृतसर से आए फोन पर जब बहन संघमित्रा ने वर्षों बाद अपने भाई की आवाज सुनी तो उसे यकीन हुआ कि उसका भाई सच में लौट आया है।
लापता होने के बाद पाकिस्तान पहुंच गया था प्रसन्नजीत
परिवार के मुताबिक प्रसन्नजीत साल 2017-18 में अचानक घर से लापता हो गया था। कुछ समय बाद वह बिहार से वापस घर लौटा, लेकिन 2019 में फिर से गायब हो गया। काफी तलाश के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला और परिवार ने उसे मृत मान लिया था। हालांकि दिसंबर 2021 में एक फोन कॉल से परिवार को पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है। जानकारी मिली कि 1 अक्टूबर 2019 को पाकिस्तान के बाटापुर इलाके से उसे हिरासत में लिया गया था।
बहन ने हर दरवाजा खटखटाया, राखी भी भेजी
भाई के पाकिस्तान में बंद होने की जानकारी मिलने के बाद संघमित्रा लगातार उसकी रिहाई के लिए संघर्ष करती रही। उसने प्रशासन, नेताओं और मीडिया से मदद की गुहार लगाई। कई बार आर्थिक तंगी के कारण उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान रक्षाबंधन पर भाई को राखी भेजने की मार्मिक कहानी भी सामने आई थी। भाई के लापता होने के सदमे में प्रसन्नजीत के पिता का भी निधन हो गया था।
पढ़ाई में तेज था प्रसन्नजीत
प्रसन्नजीत पढ़ाई में काफी होशियार था। उसके पिता लोपचंद रंगारी ने कर्ज लेकर उसे जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई करवाई थी। साल 2011 में उसने एमपी स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रेशन भी कराया था। हालांकि मानसिक स्थिति खराब होने के कारण उसे पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ा। बेटे की बीमारी से परिवार हमेशा चिंता में रहता था और घर में त्योहार भी खुशियों के साथ नहीं मन पाते थे।
अब अमृतसर में है प्रसन्नजीत, परिवार जाएगा लेने
जानकारी के मुताबिक अटारी-वाघा बॉर्डर पर कस्टम और इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रसन्नजीत फिलहाल अमृतसर के रेड क्रॉस भवन मजीठा रोड और गुरु नानक देव अस्पताल में रखा गया है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उसे लाने में दिक्कत महसूस कर रहा था, लेकिन अब उन्हें सहयोग मिल गया है और जल्द ही परिजन अमृतसर जाकर प्रसन्नजीत को घर लाने वाले हैं।



