हॉर्मुज पर यूएन में टकराव, रूस-चीन के वीटो से अटका वैश्विक प्रस्ताव

यूएन सुरक्षा परिषद में हॉर्मुज खोलने का प्रस्ताव फेल, रूस-चीन का वीटो बहरीन के प्रस्ताव में कई बदलाव के बावजूद नहीं बनी सहमति दुनिया की 20% तेल सप्लाई पर खतरा, ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

यूएन में हॉर्मुज पर बड़ा झटका, रूस-चीन ने प्रस्ताव पर लगाया वीट, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर लाया गया प्रस्ताव पास नहीं हो सका। रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया, जबकि यह प्रस्ताव पहले ही कई बार नरम किया जा चुका था ताकि दोनों देश इसके पक्ष में आ जाएं। 15 सदस्यीय परिषद में वोटिंग 11-2 से हुई, जबकि पाकिस्तान और कोलंबिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

 

बहरीन का प्रस्ताव, लेकिन नहीं बन पाई सहमति

यह प्रस्ताव बहरीन की ओर से पेश किया गया था। शुरुआत में इसमें “सभी जरूरी कदम” उठाने की बात कही गई थी, जिसमें सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी शामिल माना जा रहा था। इसका मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और किसी भी तरह की रुकावट को रोकना था।हालांकि रूस, चीन और फ्रांस जैसे वीटो पावर वाले देशों के विरोध के बाद इसमें बड़े बदलाव किए गए और सैन्य कार्रवाई से जुड़ी सभी बातें हटा दी गईं। इसके बावजूद अंत में रूस और चीन ने इसे खारिज कर दिया।

 

दुनिया के तेल सप्लाई का अहम रास्ता

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव सीधे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। अंतिम प्रस्ताव में सिर्फ इतना कहा गया था कि इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले देश आपसी सहयोग से रक्षात्मक कदम उठाएं, ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बनी रहे।

 

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा दबाव

इस वोटिंग से ठीक पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को अल्टीमेटम दिया था कि वह तय समय तक जलडमरूमध्य को खोल दे, वरना बड़े हमले झेलने के लिए तैयार रहे। इस बयान के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

 

हमलों का सिलसिला जारी, कई देश प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया हमलों के जवाब में ईरान ने 10 से ज्यादा देशों में होटल, एयरपोर्ट और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है। इनमें खाड़ी क्षेत्र के देश भी शामिल हैं, जो दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातक माने जाते हैं। ऐसे में हॉर्मुज को लेकर बढ़ता तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है।

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