मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत अलर्ट, जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से की तीन बार बात

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की कूटनीति तेज, जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से तीन बार की बातचीत। ईरान में मौजूद करीब 9 हजार भारतीयों की मदद में जुटी सरकार, सुरक्षित वापसी के लिए जारी एडवाइजरी। बांग्लादेश समेत कई पड़ोसी देशों ने भारत से मांगी डीजल सप्लाई, सरकार कर रही है समीक्षा।

Iran crisis: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को लेकर लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने बताया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी है।

 

जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच तीन दौर की बातचीत

प्रवक्ता के मुताबिक, विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हो चुकी है। सबसे ताजा बातचीत 10 मार्च 2026 को हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच खास तौर पर जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इससे ज्यादा जानकारी देना अभी जल्दबाजी होगी।

 

मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीयों की मदद कर रही सरकार

विदेश मंत्रालय के अनुसार, मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ भारतीय नागरिक अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटना चाहते हैं, ऐसे लोगों को वीजा दिलाने और बॉर्डर पार करने में भी भारतीय मिशन मदद कर रहा है। प्रवक्ता ने बताया कि ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे थे या अभी भी मौजूद हैं। इनमें छात्र, नाविक, कारोबारी, प्रोफेशनल और कुछ पर्यटक शामिल हैं। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र सुरक्षित तरीके से भारत लौट चुके हैं। वहीं तेहरान में मौजूद कई भारतीयों को एहतियातन देश के दूसरे सुरक्षित शहरों में भी शिफ्ट किया गया है। सरकार ने उन भारतीयों को सलाह दी है जो जमीनी सीमा के रास्ते ईरान छोड़ना चाहते हैं कि वे भारतीय दूतावास द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें।

 

पड़ोसी देशों ने मांगी डीजल सप्लाई

रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का बड़ा निर्यातक है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से डीजल सप्लाई की मांग की है, जिसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत 2017 से बांग्लादेश को डीजल निर्यात करता रहा है, लेकिन किसी भी फैसले से पहले देश की रिफाइनिंग क्षमता, घरेलू जरूरतों और उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा। इसके अलावा श्रीलंका और मालदीव समेत कई अन्य देशों ने भी डीजल सप्लाई को लेकर भारत से संपर्क किया है। सरकार इन सभी अनुरोधों पर अपनी ऊर्जा जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विचार कर रही है।

 

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को राहत

कूटनीतिक स्तर पर हुई बातचीत का असर यह रहा कि ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने पर सहमति जताई है। मौजूदा तनाव के बीच यह भारत के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है क्योंकि देश के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।

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