मिडिल ईस्ट युद्ध का असर: तेल $100 के पार जाने का खतरा, फॉक्सकॉन चेयरमैन ने दी चेतावनी

मिडिल ईस्ट युद्ध से तेल और कच्चे माल की कीमतों में उछाल का खतरा सप्लाई चेन बाधित होने और महंगाई बढ़ने की संभावना फॉक्सकॉन और टेक सेक्टर पर संभावित असर, 2026 के लिए नजरें चौथी तिमाही पर

Iran crisis: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) के चेयरमैन यंग लियू ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो तेल और कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर सिर्फ बड़ी कंपनियों पर ही नहीं बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा।

 

कच्चे तेल की कीमत $100 के पार जाने की आशंका

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ताइपे में मीडिया से बातचीत करते हुए यंग लियू ने कहा कि मिडिल ईस्ट दुनिया के तेल उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। अगर यहां संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसा युद्ध है जिसे कोई भी नहीं देखना चाहता और उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे।

 

सप्लाई चेन पर मंडराया खतरा

ईरान की ओर से अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में मिसाइल हमलों के बाद वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी दबाव बढ़ गया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां स्थिति बिगड़ी तो सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।

 

महंगाई बढ़ने का डर

तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। निवेशकों को आशंका है कि अगर कच्चे माल की कमी और महंगी ऊर्जा का दौर जारी रहा तो दुनिया भर में महंगाई की एक नई लहर आ सकती है।

 

टेक कंपनियों पर भी नजर

फॉक्सकॉन चेयरमैन ने कहा कि फिलहाल उनकी कंपनी पर इस संकट का असर सीमित है और उन्हें उम्मीद है कि 2026 कंपनी के लिए मजबूत साल रहेगा। एआई प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग के चलते कंपनी रिकॉर्ड कमाई कर रही है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए चिंता बढ़ गई है, क्योंकि वे यूएई को एआई कंप्यूटिंग के बड़े हब के रूप में विकसित करना चाहती हैं। फॉक्सकॉन 16 मार्च को अपनी चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेगी, जिसमें मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए आगे की रणनीति और अनुमान भी साझा किए जाएंगे।

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