मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: उदयनिधि स्टालिन का सनातन पर बयान हेट स्पीच, अमित मालवीय के खिलाफ FIR रद्द

सनातन पर बयान बना सियासी भूचाल, चुनावी साल में DMK को झटका हेट स्पीच मानते हुए कोर्ट ने कहा भाषण से हिंसा और नरसंहार का संकेत अमित मालवीय को राहत, FIR रद्द करना बताया कानून की जीत

Tamilnadu: चुनावी साल के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ DMK सरकार और डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सनातन धर्म को लेकर उदयनिधि स्टालिन के विवादित बयान को हेट स्पीच की श्रेणी में माना है और कहा है कि इस तरह के भड़काऊ बयान सनातन धर्म को मानने वालों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी मामले में कोर्ट ने BJP नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। यह FIR उदयनिधि स्टालिन के बयान का विरोध करने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर दर्ज की गई थी।

 

भाषण से नरसंहार का संकेत निकलता है: कोर्ट

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उदयनिधि स्टालिन का भाषण देश के करीब 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ था और यह नफरत फैलाने वाले भाषण के दायरे में आता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इस भाषण से नरसंहार जैसे अर्थ निकाले जा सकते हैं। न्यायमूर्ति एस. श्रीमति ने कहा कि अमित मालवीय एक सनातनी हैं और ऐसे भाषण के संभावित शिकार भी। उन्होंने केवल सनातन धर्म का बचाव किया है, जो भारतीय दंड संहिता की किसी भी आपराधिक धारा के अंतर्गत अपराध नहीं बनता।

 

मालवीय के खिलाफ केस चलाना कानून का दुरुपयोग

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देने के लिए अमित मालवीय के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे उन्हें अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि हैरानी की बात है कि कथित नफरत भरे भाषण देने वाले मंत्री के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन उस भाषण पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति पर हेट स्पीच का केस कर दिया गया।

 

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद वर्ष 2023 का है, जब तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स एंड आर्टिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी और इसके “उन्मूलन” की बात कही थी। इस बयान के बाद मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं।

 

अमित मालवीय पर FIR क्यों दर्ज हुई?

सम्मेलन के बाद अमित मालवीय ने उदयनिधि के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और कहा कि यह बयान सनातन धर्म को मानने वाले 80 प्रतिशत लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने जैसा है। इसके बाद DMK एडवोकेट विंग के नेता केएवी दिनाकरन की शिकायत पर मालवीय के खिलाफ IPC की धारा 153, 153A और 505(1)(b) के तहत FIR दर्ज की गई।

 

मालवीय का पक्ष

अमित मालवीय ने कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने कोई नई बात नहीं गढ़ी, बल्कि वही वीडियो साझा किया जो पहले से सार्वजनिक था। उन्होंने कहा कि मंत्री का बयान बेहद गंभीर था और इससे देश के बहुसंख्यक समाज के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा मिल सकता था। उनके खिलाफ दर्ज केस को उन्होंने राजनीति से प्रेरित बताया।

 

हिंदू धर्म पर स्पष्ट हमला: कोर्ट

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि DMK पार्टी से जुड़ी कई घटनाएं रिकॉर्ड पर हैं, जिनमें भगवान राम की मूर्ति को चप्पलों की माला पहनाना और गणेश प्रतिमाओं को तोड़ना शामिल है। अदालत ने कहा कि इन मामलों में शिकायतें होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हिंदू धर्म को निशाना बनाया गया।

Related Articles

Back to top button