भारतीय नौसेना को मिलेगी नई तकनीकी बढ़त: AIP सिस्टम जल्द INS खंडेरी में

INS खंडेरी में जल्द स्वदेशी AIP सिस्टम इंस्टॉल, नौसेना को मिलेगी ताकतवर बढ़त AIP तकनीक से पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी, स्टेल्थ ऑपरेशन बढ़ेगा स्वच्छ फ्यूल‑सेल ऊर्जा और आत्मनिर्भरता: भारत AIP विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना जल्द ही तकनीक के मामले में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाने वाली है। इस साल के अंत तक कलवरी क्लास पनडुब्बी INS खंडेरी में स्वदेशी एयर‑इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम लगाया जा सकता है। यह सिस्टम DRDO ने तैयार किया है। इस सिस्टम के इंस्टॉल होने के बाद नौसेना की समुद्र के अंदर लड़ने की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

 

AIP क्या है और क्यों जरूरी है

AIP एक खास तकनीक है, जिससे डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं। आम तौर पर ऐसी पनडुब्बियों को हर कुछ दिनों में बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है। यह उन्हें दुश्मन के रडार और एंटी-सबमरीन सिस्टम के लिए आसानी से पकड़ने योग्य बनाता है। AIP सिस्टम लगने के बाद पनडुब्बी को बार-बार सतह पर आने की जरूरत नहीं होगी, जिससे स्टेल्थ (छिपकर संचालन) क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

 

कितनी देर पानी के भीतर रह पाएगी पनडुब्बी

इस तकनीक के बाद पनडुब्बी कई हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती है। कम गति पर लगभग 13 से 21 दिन लगातार समुद्र के अंदर रहना संभव होगा। इस दौरान बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आने की जरूरत नहीं होगी। इससे सतर्कता और जीवंतता दोनों बेहतर होंगी।

 

फ्यूल‑सेल आधारित स्वच्छ ऊर्जा

AIP तकनीक में फ्यूल‑सेल का इस्तेमाल होता है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली बनती है।यह पूरी प्रक्रिया धुआं या प्रदूषण मुक्त है। मुख्य बाई‑प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ साफ पानी निकलता है। खास बात यह है कि पनडुब्बी के अंदर ही हाइड्रोजन तैयार किया जाता है।

 

NMRL की तकनीक और ट्रायल

भारत का यह AIP सिस्टम पुणे स्थित नेवल मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (NMRL) ने तैयार किया है। इसमें फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल‑सेल तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। परियोजना को 2014 में स्वीकृति मिली थी। सिस्टम का लंबे समय तक जमीन पर परीक्षण किया गया और यह सभी मानकों पर खरा उतरा। ट्रायल में इसने 200 किलोवॉट से ज्यादा बिजली बनाने की क्षमता दिखाई।

 

फिटमेंट और ट्रायल टाइमलाइन

AIP का एनर्जी मॉड्यूल अगले 3–4 महीनों में MDL (मझगांव डॉक शिपयार्ड लिमिटेड) को सौंपा जाएगा। INS खंडेरी जब डॉकयार्ड में मरम्मत और अपग्रेड के लिए जाएगी, तब मॉड्यूल फिट किया जाएगा। शुरुआती समुद्री परीक्षण जुलाई–अगस्त 2027 के बीच शुरू हो सकते हैं। पूरा अपग्रेड और ओवरहॉल 2028 की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है।

 

रणनीतिक बढ़त और आत्मनिर्भरता

यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो भारत उन कुछ चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जिन्होंने स्वदेशी AIP तकनीक विकसित की है। इससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी। विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी।

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