पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का कहर जारी, 9 दिनों में 19 मौतें
9 दिनों में 19 मौतें, पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों का कहर बेनीसागर से बाबाडिया तक फैला आतंक, वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Jharkhand news: पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। मझगांव प्रखंड के झारखंड–ओडिशा सीमा से सटे बेनीसागर गांव में शुक्रवार को हाथी के हमले में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में 40 वर्षीय प्रकाश मालवा और एक नाबालिग बच्चा शामिल है। बताया जा रहा है कि हाथी ने दोनों को सूंड से उठाकर पटक-पटक कर मार डाला। घटना के बाद हाथी काफी देर तक बच्चे के शव के पास खड़ा रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और मझगांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई। इन दो मौतों के साथ ही बीते 9 दिनों में जिले में हाथी के हमलों से मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।
6 जनवरी की भयावह रात ने बढ़ाया संकट
6 जनवरी की रात पश्चिमी सिंहभूम के लिए सबसे भयावह साबित हुई। नोवामुंडी प्रखंड के बाबाडिया गांव और हाटगम्हरिया के सियालजोड़ा गांव में एक ही रात में सात ग्रामीणों की जान चली गई। भीड़ से भटका एक दांतेल हाथी गांवों में घुस आया और अलग-अलग टोलों में सो रहे लोगों को निशाना बनाया। सबसे दर्दनाक घटना बाबाडिया गांव के मुंडा साईं टोला में हुई, जहां कुंबा में सो रहे एक ही परिवार के चार सदस्यों, सनातन मेराल (53), उनकी पत्नी जोलको कुई (51), छह वर्षीय मंगडू मेराल और आठ वर्षीय दमयंती मेराल — को हाथी ने बेरहमी से मार डाला। परिवार की दस वर्षीय बेटी सुशीला मेराल गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि 14 वर्षीय पुत्र जयपाल मेराल किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा।
एक ही हाथी पर कई हमलों का आरोप
वन विभाग के अनुसार, यह वही हाथी बताया जा रहा है जिसने गोइलकेरा और टोंटो प्रखंड में भी चार लोगों को कुचलकर मार डाला था। हाथी लगातार इलाका बदलकर ग्रामीण क्षेत्रों में घुस रहा है और जानलेवा हमले कर रहा है।
वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल
लगातार हो रही मौतों के बावजूद हाथी को नियंत्रित करने में वन विभाग को अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। गश्ती दल, माइकिंग और पटाखों के जरिए हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग रात में घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।
मुआवजा और स्थायी समाधान की मांग
लगातार हो रही मौतों से गुस्साए ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को जल्द मुआवजा देने, प्रभावित गांवों में सुरक्षा बलों की तैनाती और हाथियों के स्थायी पुनर्वास की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
1 जनवरी से लगातार हो रही मौतें
1 जनवरी: टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव में मंगल सिंह हेंब्रम (35) की मौत, उसी रात बिरसिंहहातु गांव में उर्दूप बहंदा (55) की जान गई, सदर प्रखंड के रोरो गांव में विष्णु सुंडी (57) की मौत, 2 जनवरी: गोइलकेरा के सायतवा गांव में 13 वर्षीय रेंगा कयोम की मौत। चक्रधरपुर के बाईपी गांव में 10 वर्षीय ढिंगी गागराई की मौत, 4 जनवरी: अमराई कितापी गांव में महिला की मौत, पति और बेटा घायल, 5 जनवरी: मिस्त्रीबेड़ा गांव में जोंगा लागुरी (50) की मौत, 6 जनवरी: सोवा गांव में कुंदरा बाहदा, उनके 6 साल के बेटे और 8 महीने की बेटी की मौत, सियालजोड़ा गांव में इलाज के दौरान चिपरी हेम्ब्रम की मौत।



