दिल्ली-नोएडा हादसों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन, कानपुर देहात में दलदल ने ली युवक की जान
स्ट्रीट लाइट न होने से बाइक सवार गहरे गड्ढे में गिरा सुबह किसानों ने निकाला, अस्पताल में तोड़ा दम सड़क सुरक्षा पर फिर उठे बड़े सवाल

Up news: नोएडा और दिल्ली में सड़क हादसों की चर्चाओं के बीच कानपुर देहात से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां रसूलाबाद के भवानीपुर गांव के रहने वाले 25 वर्षीय धीरेंद्र कुमार की मौत ने एक परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। जिस सड़क से वह रोज घर आता-जाता था, वही सड़क उसकी जिंदगी की आखिरी राह बन गई। यह हादसा शिवली कोतवाली क्षेत्र के रूरा-शिवली मार्ग पर कड़ी गांव के पास हुआ।
पनकी पावर हाउस में करता था नौकरी
धीरेंद्र पनकी पावर हाउस में वेल्डर के तौर पर काम करता था। मंगलवार शाम करीब 6 बजे वह बाइक से घर लौट रहा था। रास्ते में घना अंधेरा था और सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही थी। इसी दौरान उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे, कीचड़ भरे गड्ढे में जा गिरी। गड्ढा सड़क से काफी नीचे था, जिससे वह गिरने के बाद किसी की नजर में नहीं आ सका।
पूरी रात दलदल में फंसा रहा
बताया जा रहा है कि धीरेंद्र करीब 12 घंटे तक उसी दलदल में फंसा रहा। ठंड और कीचड़ के बीच वह मदद के लिए आवाज लगाता रहा, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। अंधेरा और सुनसान सड़क उसकी पुकार को निगल गए। वह पूरी रात जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन मदद नहीं पहुंच सकी।
सुबह किसानों ने देखा तो मचा हड़कंप
बुधवार सुबह जब किसान खेतों की ओर जा रहे थे, तब उनकी नजर कीचड़ में धंसी बाइक पर पड़ी। पास जाकर देखा तो एक युवक उसमें फंसा हुआ था। ग्रामीणों ने तुरंत ग्राम प्रधान अंकुश कुमार और विजय कुमार को सूचना दी। सबने मिलकर उसे बाहर निकाला। उसका शरीर ठंड से अकड़ चुका था। ग्रामीणों ने आग जलाकर उसे गर्म करने की कोशिश की और 102 एंबुलेंस से शिवली अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिवार को सुबह मिली दर्दनाक खबर
धीरेंद्र के भाई बृजेंद्र कुमार ने बताया कि वह रात भर घर नहीं लौटा तो परिवार चिंतित था। सुबह पुलिस का फोन आया और हादसे की जानकारी मिली। शिवली कोतवाली प्रभारी प्रवीण यादव के अनुसार, प्रथम दृष्टया हादसे की वजह सड़क किनारे गहरा गड्ढा और स्ट्रीट लाइट का अभाव माना जा रहा है।
फिर उठे सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रूरा-शिवली मार्ग पर स्ट्रीट लाइट की कमी और खुले गड्ढे पहले भी समस्या रहे हैं। धीरेंद्र की मौत को लोग सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी मान रहे हैं। बड़ा सवाल यही है कि ऐसी लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?



