डिजिटल साक्षरता: किसानों की आय बढ़ाने का नया रास्ता

डिजिटल तकनीक ने खेती और पशुपालन के तरीकों को तेजी से बदल दिया है। सही समय पर जानकारी, ऑनलाइन बाजार और सरकारी योजनाओं की डिजिटल पहुंच से किसानों को बड़ा फायदा मिल रहा है। डिजिटल साक्षरता किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने का नया मजबूत रास्ता बन रही है।

Agriculture: खेती और पशुपालन अब केवल पारंपरिक अनुभव तक सीमित नहीं रहे। समय पर सही जानकारी और आधुनिक तकनीक के उपयोग ने कृषि क्षेत्र की दिशा बदल दी है। डिजिटल साक्षरता आज किसानों और पशुपालकों के लिए आय बढ़ाने, जोखिम कम करने और पारदर्शिता लाने का एक मजबूत माध्यम बन रही है।

 

समय पर जानकारी, बेहतर फैसले

डिजिटल माध्यमों के जरिए किसानों को मौसम की सटीक जानकारी, फसल और पशुओं में होने वाली बीमारियों की पहचान, खाद-बीज और दवाओं के सही उपयोग की जानकारी समय पर मिल जाती है। इससे उत्पादन लागत घटती है और नुकसान की संभावना कम होती है। मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसान मंडी भाव जान सकते हैं, ऑनलाइन बाजारों से जुड़ सकते हैं और सीधे खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं, जिससे उन्हें अपनी उपज और पशु उत्पाद का बेहतर दाम मिल पाता है।

 

पशुपालन में भी डिजिटल तकनीक का लाभ

पशुपालकों के लिए डिजिटल साक्षरता विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। ऑनलाइन पशु चिकित्सा सलाह, टीकाकरण और प्रजनन से जुड़ी जानकारी, साथ ही दूध और मांस उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीके अब आसानी से उपलब्ध हैं। इससे पशु स्वास्थ्य बेहतर रहता है और आकस्मिक बीमारियों का जोखिम घटता है।

 

MSP और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता

डिजिटल साक्षरता का सीधा प्रभाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली खरीद प्रक्रिया में भी देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश में डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल से 4 लाख से अधिक किसानों की भागीदारी के साथ करीब 25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिला और लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ी।

 

डिजिटल पहचान और एग्रीस्टैक

बीते वर्षों में सरकार की ओर से डिजिटल पहचान (Digital ID) जैसे कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को डिजिटल आईडी जारी की जा चुकी है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि रिकॉर्ड, फसल और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी एकीकृत रूप में उपलब्ध रहती है।इसी कड़ी में भारत सरकार द्वारा एग्रीस्टैक (Agristack) तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र का डिजिटलीकरण करना है। यह किसानों का एक डिजिटल डेटाबेस बनाता है, जिससे उन्हें सरकारी लाभ, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, फसल बीमा और संस्थागत ऋण आसानी से मिल सके।

 

डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की जरूरत

हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसे दूर करने के लिए स्थानीय भाषा में सरल प्रशिक्षण, गांव स्तर पर डिजिटल सहायता केंद्र और पंचायतों की सक्रिय भूमिका जरूरी मानी जा रही है। किसानों को मौसम जानकारी, फसल सलाह, कीट-रोग पहचान, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और मंडी भाव देखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

 

एक व्यावहारिक रोडमैप

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के लिए चरणबद्ध और व्यावहारिक डिजिटल रोडमैप तैयार करना जरूरी है। इसमें ऑनलाइन पंजीकरण, सब्सिडी आवेदन, पीएम-किसान, फसल बीमा, ओटीपी और साइबर सुरक्षा जैसी बुनियादी जानकारियां शामिल हों। साथ ही ई-नाम, एफपीओ प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन खरीद-बिक्री और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाए।

 

निष्कर्ष

डिजिटल तकनीक खेती और पशुपालन को एक आधुनिक और सम्मानजनक पेशे के रूप में स्थापित कर रही है। सही रणनीति, निरंतर प्रशिक्षण और फीडबैक सिस्टम के साथ डिजिटल साक्षरता किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत और स्थायी रास्ता बन सकती है।

लेखक: विजय शर्मा, (वरिष्ठ पत्रकार)

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