ईरान में विरोध तेज, संसद में गूंजे ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर संसद में तीखी बहस, अमेरिका के खिलाफ नारे संसद अध्यक्ष की चेतावनी अमेरिका और इजरायल बनेंगे वैध निशाने आर्थिक संकट से शुरू हुआ आंदोलन अब धार्मिक सरकार के खिलाफ खुली चुनौती

ईरान में पिछले एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर रविवार को संसद में तीखी बहस हुई। इस दौरान सांसदों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और सरकार के समर्थन में भी आवाज बुलंद की। यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब सरकार विरोध प्रदर्शनों पर काबू पाने में नाकाम दिखाई दे रही है। संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने इन प्रदर्शनों के बहाने ईरान पर हमला किया, तो अमेरिकी सेना और इजरायल दोनों ईरान के लिए वैध निशाने होंगे।

 

हिंसा बढ़ने की आशंका, सूचनाओं पर रोक

ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और फोन लाइनें भी काट दी गई हैं, जिससे बाहर बैठे लोगों के लिए हालात की सही जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,600 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विदेशों में रह रहे ईरानियों को आशंका है कि सूचनाओं पर रोक से सुरक्षा एजेंसियों को हिंसक कार्रवाई करने की खुली छूट मिल सकती है। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की रक्षा के लिए ईरान के खिलाफ कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे।

 

खामेनेई सरकार का सख्त रुख

अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सख्ती के संकेत दिए हैं। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को “खुदा का दुश्मन” माना जाएगा, जो ईरान में मौत की सजा वाला अपराध है। सरकारी टीवी के बयान में यह भी कहा गया है कि जो लोग प्रदर्शनकारियों या “दंगाइयों” की मदद करेंगे, उन पर भी यही आरोप लगाया जाएगा।

 

निर्वासित क्राउन प्रिंस की प्रदर्शनकारियों से अपील

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने नया संदेश जारी कर लोगों से रविवार को सड़कों पर उतरने की अपील की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ईरान के पुराने ‘शेर और सूरज’ वाले झंडे और शाह के दौर के राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल का आग्रह किया, ताकि सार्वजनिक जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई जा सके।

 

आर्थिक संकट से शुरू हुआ आंदोलन

ईरान में ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे, जब ईरानी रियाल की कीमत तेजी से गिर गई। फिलहाल ईरानी मुद्रा 1 डॉलर के मुकाबले 14 लाख से ज्यादा पर पहुंच चुकी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बने दबाव ने देश की अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया है। आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे ईरान की धार्मिक सरकार को चुनौती देने वाली मांगों में बदल चुका है।

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