बोतलबंद पानी के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर PIL खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने बताया ‘लग्जरी मुद्दा’
सुप्रीम कोर्ट ने बोतलबंद पानी के अंतरराष्ट्रीय मानकों को लेकर दायर PIL खारिज कर दी। अदालत ने कहा जब देश में आज भी करोड़ों लोग साफ पानी से वंचित हैं। ऐसे में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर की गुणवत्ता पर बहस ‘लग्जरी मुद्दा’ है।


सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है, जिसमें भारत में बिकने वाले बोतलबंद पानी (Packaged Drinking Water) के लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू करने की मांग की गई थी। अदालत ने इस याचिका को “लग्जरी लिटिगेशन” करार दिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि देश के एक बड़े हिस्से में आज भी लोगों को पीने का साफ पानी मुश्किल से मिल रहा है। ऐसे हालात में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानकों की मांग करना प्राथमिकता का विषय नहीं है।
PIL में क्या मांग की गई थी?
Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में सिंगापुर, यूरोपीय यूनियन और अन्य विकसित देशों जैसे मानकों को भारत में लागू करने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार बोतलबंद पानी में हानिकारक रसायनों की अधिकतम सीमा तय की जानी चाहिए, क्योंकि यह लोगों की सेहत और सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ठुकराई याचिका?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह सोच शहरी नजरिए से प्रेरित है। अदालत ने कहा कि भारत का बड़ा हिस्सा आज भी ग्रामीण इलाकों में रहता है, जहां लोग भूजल पर निर्भर हैं और कई जगहों पर बुनियादी पेयजल तक उपलब्ध नहीं है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता देश की जमीनी हकीकत समझना चाहता है, तो उसे महात्मा गांधी की तरह गांव-गांव जाकर देखना चाहिए, जहां लोग आज भी पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक देश में सभी के लिए मूलभूत पेयजल की समस्या हल नहीं होती, तब तक ऐसे “लग्जरी” मुद्दों पर विचार नहीं किया जा सकता।



