अमेरिका-रूस के बीच आखिरी हथियार नियंत्रण समझौता टूटने की कगार पर
न्यू START समझौता खत्म होते ही अमेरिका और रूस पर परमाणु हथियारों की कोई सीमा नहीं रहेगी विशेषज्ञों को आशंका, तीन देशों के बीच शुरू हो सकती है अनियंत्रित परमाणु हथियारों की होड़ ट्रंप की नीतियों और रूस की चेतावनियों से वैश्विक सुरक्षा पर मंडराया खतरा

Nuclear deal: अमेरिका और रूस के बीच बचा हुआ आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता न्यू START अब अपने अंत की ओर है। यह समझौता 5 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों पर कोई भी कानूनी सीमा नहीं बचेगी। पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा, जब अमेरिका और रूस बिना किसी परमाणु नियंत्रण समझौते के आमने-सामने होंगे। विशेषज्ञों को डर है कि इससे परमाणु हथियारों की अनियंत्रित होड़ शुरू हो सकती है और दुनिया एक बार फिर परमाणु युद्ध के बेहद करीब पहुंच सकती है।
क्यों टूट रहा है अमेरिका-रूस का ये अहम समझौता?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका भी सहमत हो, तो न्यू START की सीमाओं का एक साल और पालन किया जाए। इसका मकसद नए समझौते के लिए वक्त हासिल करना था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई। ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि वे परमाणु हथियारों पर सीमा चाहते हैं, लेकिन चीन को भी इस समझौते में शामिल करना जरूरी मानते हैं। वहीं चीन ने साफ कर दिया है कि वह अपने अपेक्षाकृत छोटे, लेकिन तेजी से बढ़ते परमाणु भंडार पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार नहीं करेगा। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ट्रंप इस पर “अपने समय पर फैसला” लेंगे।
क्रेमलिन की चेतावनी: दुनिया और ज्यादा खतरनाक हो जाएगी
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि अगर अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों पर कोई सीमा नहीं रही, तो दुनिया और ज्यादा अस्थिर और खतरनाक हो जाएगी। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डैरिल किम्बॉल ने चेताया कि इस समझौते के खत्म होने के बाद दोनों देश 35 साल में पहली बार अपने तैनात परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा सकते हैं। उनका कहना है कि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन-तरफा परमाणु होड़ शुरू हो सकती है, जहां हर देश सबसे खराब हालात की तैयारी करेगा।
न्यू START समझौता था क्या?
न्यू START समझौते पर 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों को: अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स, और 700 मिसाइलों व बॉम्बर्स तक सीमित रखा गया था। यह समझौता 2021 में पांच साल के लिए बढ़ाया गया था। इसमें आपसी भरोसे के लिए ऑन-साइट निरीक्षण का प्रावधान भी था, लेकिन कोविड-19 के बाद यह प्रक्रिया कभी बहाल नहीं हो सकी। फरवरी 2023 में यूक्रेन युद्ध के चलते पुतिन ने रूस की भागीदारी निलंबित कर दी, हालांकि सीमाओं का पालन करने की बात कही गई थी।
ट्रंप के बयानों से बढ़ी वैश्विक चिंता
अक्टूबर 2025 में ट्रंप ने यह कहकर चिंता और बढ़ा दी कि अमेरिका परमाणु परीक्षण फिर शुरू कर सकता है। इस बयान के बाद रूस ने भी साफ कर दिया कि अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो रूस भी जवाब देगा। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि किसी भी परीक्षण में वास्तविक परमाणु विस्फोट शामिल नहीं होंगे।
हथियार नियंत्रण की 50 साल पुरानी श्रृंखला टूटने की कगार पर
न्यू START, 1972 के SALT-I समझौते से शुरू हुई परमाणु हथियार नियंत्रण श्रृंखला का आखिरी हिस्सा है। 2001 में अमेरिका ABM ट्रीटी से बाहर निकला, 2019 में INF ट्रीटी भी खत्म हो गई। इसके बाद रूस ने Burevestnik और Poseidon जैसे नए हथियार विकसित किए। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने चेतावनी दी है कि बिना किसी समझौते के रूस हर नई चुनौती का सख्त जवाब देगा।
“गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस ने बढ़ाई रूस-चीन की बेचैनी
ट्रंप की प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस योजना ने रूस और चीन दोनों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देश अपने आक्रामक हथियार और तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। डैरिल किम्बॉल के मुताबिक, “यह हमारे जीवनकाल की सबसे खतरनाक परमाणु प्रतिस्पर्धा की शुरुआत हो सकती है।”



