‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ का असर: नशे से बाहर आकर नई जिंदगी शुरू कर रहे लोग
पंजाब में नशा विरोधी अभियान ला रहा बदलाव रिहैब के साथ रोजगार पर सरकार का फोकस रिकवरी के बाद लोग लौट रहे सामान्य जिंदगी में

चंडीगढ़, 25 मार्च
पंजाब में नशों के खिलाफ चल रही जंग अब असर दिखाने लगी है। भगवंत मान सरकार का ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा छोड़ चुके लोगों को दोबारा समाज से जोड़ने और उन्हें रोजगार देने पर भी जोर दे रहा है। अब कई लोग नशे की दलदल से निकलकर एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन की ओर लौट रहे हैं।
जिंदगी में बदलाव की कहानी
अभिषेक कुमार (नाम बदला गया) उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने इस बदलाव को करीब से महसूस किया। कभी नशे की लत में फंसे अभिषेक की हालत इतनी खराब हो गई थी कि सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो गया था। आज वह नौकरी कर रहे हैं और अपने परिवार के साथ दोबारा जुड़ चुके हैं।
परिवार और इलाज बना सहारा
अभिषेक का यह सफर आसान नहीं था। परिवार के सहयोग, इलाज और काउंसलिंग के साथ-साथ सरकारी पुनर्वास योजनाओं और रोजगार सहायता ने उन्हें नई शुरुआत करने का मौका दिया। उनके मुताबिक, नौकरी मिलने के बाद ही जिंदगी ने सही दिशा पकड़ी।
घर से शुरू हुआ बदलाव
नवदीप कुमार (नाम बदला गया) के जीवन में बदलाव की शुरुआत उनके परिवार से हुई। घर में लगातार हो रहे तनाव और दूरी ने उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया। इलाज के बाद उन्हें नौकरी मिली, जिसने उनके जीवन में अनुशासन और मकसद वापस ला दिया।
भरोसा और सम्मान की वापसी
गुरजिंदर सिंह (नाम बदला गया) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। नशे ने उनकी सेहत और पारिवारिक विश्वास दोनों को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन पुनर्वास और माता-पिता के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला। अब वह काम कर रहे हैं और उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौट रही है।
रोजगार से मजबूत हो रही रिकवरी
सरकार की रणनीति साफ है कि नशा मुक्ति के बाद लोगों को रोजगार से जोड़ना जरूरी है। अधिकारियों का मानना है कि आर्थिक स्थिरता के बिना रिकवरी अधूरी रहती है। यही वजह है कि अब पुनर्वास, काउंसलिंग और रोजगार को साथ जोड़कर लोगों को नई जिंदगी दी जा रही है।



