महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक में बवाल: महायुति की दरारें खुलकर सामने

महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक ने महायुति के भीतर गहराती दरारों को उजागर कर दिया। शिंदे शिवसेना के मंत्री बैठक से दूर रहे और बीजेपी पर पक्षप्रवेश के आरोप लगाए। फडणवीस के जवाब, विपक्ष के हमले और टिकट बंटवारे की लड़ाई ने तनाव और बढ़ा दिया।

Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद हलचल भरा रहा। मंत्रिमंडल बैठक ने साफ कर दिया कि सत्तारूढ़ महा‌युति गठबंधन की अंदरूनी खींचतान अब सतह पर आ चुकी है। बैठक में शिंदे शिवसेना के कई मंत्री गैरहाज़िर रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुद मौजूद थे। सूत्र बताते हैं कि ये नाराज़गी बीजेपी की लगातार घोषणाबाजी (पक्षप्रवेश) और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में सीट-बंटवारे को लेकर बढ़ते असंतोष की वजह से है।

 

कैसे फूटा गुस्सा?

कैबिनेट बैठक मंत्रालय की 7वीं मंज़िल पर हो रही थी, लेकिन शिंदे गुट के मंत्री ऊपर जाने के बजाय 6ठी मंज़िल पर CM फडणवीस के दफ़्तर में बैठे रहे। बैठक के बाद वे सीधे CM फडणवीस के पास पहुंचे और अपना विरोध रखा।

 

मंत्रियों का आरोप:

बीजेपी हमारे कार्यकर्ताओं को तोड़कर अपने संगठन में शामिल कर रही है। खास तौर पर मंत्री रविंद्र चव्हाण पर “स्थानीय स्तर पर दखल देकर कार्यकर्ताओं को बीजेपी में करवाने” का आरोप।

 

CM फडणवीस का पलटवार

फडणवीस ने साफ कहा, “उल्हासनगर में शुरुआत आप लोगों ने की थी। आप करेंगे तो ठीक, बीजेपी करेगी तो गलत, ये नहीं चलेगा। अब से कोई भी दल दूसरे दल के कार्यकर्ताओं को प्रवेश नहीं देगा। नियम दोनों पर लागू होगा।” तनाव बढ़ने पर बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुळे मंत्रालय पहुंचे और उपमुख्यमंत्री शिंदे से बंद कमरे में लंबी बैठक हुई। माना जा रहा है कि विवाद को सार्वजनिक रूप से बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई।

 

विपक्ष का वार: ‘घर में ही कलह’

आदित्य ठाकरे (शिवसेना–UBT), “कैबिनेट बैठक का बहिष्कार जनता का अपमान है। दूसरों के घर तोड़कर आए थे, अब अपने ही घर में फूट पर चिल्ला रहे हैं।”, जितेंद्र आव्हाड (NCP-SP), “महाराष्ट्र की राजनीति अब रेसकोर्स बन गई है—घोड़ों की तरह विधायकों पर दांव लग रहा है।”, अंबादास दानवे (UBT शिवसेना),“जो हमारे बीच से गए थे, अब एक-दूसरे का गला दबा रहे हैं।” “आधा शिंदे गुट बीजेपी में चला जाएगा।”, “शिंदे गुट के मंत्री CM फडणवीस की ही सुनते हैं।” “ठाणे में एक-दूसरे पर गोली चलाने वाले आज एक ही गठबंधन में बैठे हैं।” “ये है कर्म का फल।”

 

अजित पवार का ‘हल्का’ जवाब

अजित पवार ने शांत प्रतिक्रिया दी:, “मामले की मुझे ज़्यादा जानकारी नहीं। हमारे नेता भी बैठक से बाहर गए क्योंकि आज नामांकन वापसी का आखिरी दिन था। अगर पहले पता होता तो मैं शिंदे से पूछ लेता।”

 

विवाद की असली वजह क्या है?

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक महायुति की कलह की जड़ ये मुद्दे हैं:, बीएमसी और ठाणे नगरपालिका चुनावों में टिकट का दंगल, लगातार पक्षप्रवेश से परस्पर अविश्वास, शिंदे गुट की भविष्य को लेकर बढ़ती असुरक्षा, 2022 में शिवसेना टूटने के बाद बना अविश्वास का माहौल, सत्ता में शक्ति संतुलन और निर्णयों पर दबाव, ताज़ा घटनाएँ: पिछले महीने उल्हासनगर में बीजेपी के 4 पूर्व पार्षद शिंदे शिवसेना में आए थे। आज बीजेपी ने ठाणे के डोंबिवली में शिवसेना के 5 पूर्व पार्षदों को शामिल किया,  इससे शिंदे गुट भड़क गया। संभाजीनगर में शिंदे गुट के मंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ चुके राजू शिंदे को बीजेपी ने आज शामिल किया।

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