भारतीय नौसेना का प्राचीन पाल विधि से बना जहाज INSV ‘कौंडिन्य’ मस्कट पहुंचा, 18 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी
18 दिन की समुद्री यात्रा पूरी कर INSV ‘कौंडिन्य’ मस्कट पहुंचा अजंता गुफाओं से प्रेरित डिजाइन, पूरी तरह पारंपरिक तकनीक से निर्माण भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को जीवंत करता ऐतिहासिक अभियान

Indian Navy: भारतीय नौसेना का पारंपरिक पाल विधि से निर्मित जहाज INSV ‘कौंडिन्य’ ने इतिहास रचते हुए अपनी 18 दिनों की समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह जहाज 29 दिसंबर 2025 को गुजरात के पोरबंदर से रवाना हुआ था और बुधवार को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचा। यह यात्रा भारत की प्राचीन समुद्री विरासत और नाविक परंपराओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्राचीन भारतीय नाविक के नाम पर रखा गया जहाज
INSV ‘कौंडिन्य’ का नाम महान भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने प्राचीन काल में हिंद महासागर पार कर दक्षिण-पूर्व एशिया तक यात्रा की थी। इस जहाज का डिजाइन अजंता की गुफाओं में चित्रित 5वीं शताब्दी ईस्वी के एक जहाज से प्रेरित है।
पूरी तरह पारंपरिक तकनीक से हुआ निर्माण
इस जहाज का निर्माण आधुनिक वेल्डिंग तकनीक से नहीं, बल्कि प्राचीन ‘स्टिच्ड शिप’ तकनीक से किया गया है। लकड़ी के तख्तों को कोयर रस्सी, नारियल के रेशे और प्राकृतिक रेजिन की मदद से सिला गया है। केरल के कुशल कारीगरों की टीम ने इस जहाज को तैयार किया, जिनके मास्टर शिपराइट बाबू शंकरन थे।
अभियान का नेतृत्व और टीम
INSV ‘कौंडिन्य’ के कैप्टन कमांडर विकास श्योरन हैं, जबकि कमांडर वाई. हेमंत कुमार इस अभियान के प्रभारी अधिकारी रहे। दल में कुल 4 अधिकारी और 13 नौसैनिक शामिल थे।प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल भी इस अभियान का हिस्सा रहे और उन्होंने यात्रा के दौरान सोशल मीडिया पर नियमित अपडेट साझा किए।
जुलाई 2023 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
इस परियोजना को लेकर जुलाई 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और एम/एस होडी इनोवेशंस के बीच समझौता हुआ था। जहाज के निर्माण के लिए संस्कृति मंत्रालय ने फंडिंग की। सितंबर 2023 में जहाज की तली (कील) बनाई गई, फरवरी 2025 में गोवा में इसका औपचारिक लॉन्च हुआ, डिजाइन, तकनीकी परीक्षण और निर्माण की पूरी निगरानी भारतीय नौसेना ने की। चूंकि कोई पुराना ब्लूप्रिंट उपलब्ध नहीं था, इसलिए अजंता गुफाओं के चित्रों के आधार पर डिजाइन तैयार किया गया। IIT मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग विभाग में जहाज की हाइड्रोडायनामिक टेस्टिंग की गई।
जहाज में दिखती है भारतीय संस्कृति की झलक
INSV ‘कौंडिन्य’ में कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीक शामिल किए गए हैं: पालों पर गंडभेरुंड (दो सिर वाला पक्षी) और सूर्य की आकृतियां, धनुष (फ्रंट पार्ट) पर सिंह-यली की नक्काशी, डेक पर हड़प्पा शैली का पत्थर का लंगर, ये सभी तत्व भारत की समृद्ध समुद्री परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
जांच के बाद भारत लौटेगा जहाज
भारतीय नौसेना के कमोडोर अमित श्रीवास्तव ने बताया कि इस जहाज के निर्माण और परीक्षण में नौसेना, डीआरडीओ और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने कहा कि पोरबंदर से मस्कट तक की यह यात्रा ऐतिहासिक उपलब्धि है और नौसेना द्वारा प्रशिक्षित दल हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। जरूरी जांच और मरम्मत के बाद यह जहाज भारत वापस लौटेगा।



