तेजस्वी की रैली में जुटी भीड़ ‘AI’ थी? बिहार नतीजों पर उद्धव ठाकरे का बड़ा सवाल
बिहार नतीजों पर उद्धव का बड़ा सवाल तेजस्वी की भीड़ असली थी या ‘AI की रचना’? चुनावी जीत के फ़ॉर्मूले पर उठे गंभीर सवाल.

मुंबई: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने जहाँ एक तरफ कई लोगों को चौंकाया है, वहीं अब इस पर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। RJD की करारी हार के बाद अब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस पूरी जीत पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर नतीजों और जनता के मूड में “भारी विरोधाभास” होने का आरोप लगाया है। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ‘जो जीता वही सिकंदर’ वाले बयान पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “सिकंदर जीत गया, यह तो सब कह रहे हैं, लेकिन असली बात यह है कि कोई यह नहीं समझ पा रहा कि ‘सिकंदर जीत कैसे रहा है’?”
“क्या वो भीड़ AI से आई थी?”
ठाकरे का सबसे बड़ा सवाल तेजस्वी यादव की रैलियों को लेकर था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर तेजस्वी यादव हार ही रहे थे, तो उनकी चुनावी सभाओं में वो बेतहाशा, पागलपन की हद तक जुटी भीड़ कहाँ से आ रही थी? क्या वे लोग AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा जेनरेट किए गए थे?” उन्होंने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि RJD, जिसकी रैलियों में इतना जनसैलाब उमड़ रहा था, वह पार्टी नतीजों में सिर्फ 25 सीटों पर कैसे सिमट सकती है।
“जनता जहाँ खामोश, वो जीत रहे हैं”
उद्धव ठाकरे ने एक गंभीर पैटर्न की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “यह बहुत अजीब है कि जहाँ (तेजस्वी के लिए) जनता इतनी भारी प्रतिक्रिया दे रही है, वे हार रहे हैं। और जिनके कार्यक्रमों में कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दिख रही, वे जीत रहे हैं। “उन्होंने इशारों-इशारों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उंगली उठाई। ठाकरे ने कहा, “हम महाराष्ट्र के बारे में भी चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आ रहा है।”
असली मुद्दा जनता की तकलीफ
हालांकि उन्होंने माना कि ₹10,000 (संभवतः किसी चुनावी वादे का जिक्र) जैसे फैक्टर चुनाव में असर डालते हैं, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि “जनता जो रोज-रोज तकलीफें झेल रही है, वही असली सच्चाई है।” इस बीच, जब उनसे मुंबई (BMC) चुनावों में कांग्रेस के अकेले लड़ने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सधा हुआ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे (कांग्रेस) अपनी पार्टी के लिए फैसला लेने को स्वतंत्र हैं, और हम अपने लिए निर्णय लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह रीजनल पार्टियों को खत्म करने की कोशिश है और “किसी को उन्हें राष्ट्रगीत याद दिलाना चाहिए,” जिसमें ‘पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा’ सब आते हैं।



