ईरान में विरोध पर सख्ती: जल्द सुनवाई और फांसी के संकेत, लोग दहशत में
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात और सख्त, गिरफ्तार लोगों पर जल्द फांसी के संकेत सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों मौतें, मानवाधिकार संगठनों की गंभीर चेतावनी आम लोग दहशत में, स्कूल बंद, हथियारों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

Iran protest: ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने बुधवार को संकेत दिए हैं कि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों पर जल्द सुनवाई कर उन्हें फांसी की सजा दी जा सकती है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि बड़ी संख्या में गिरफ्तार लोगों को जल्द ही मौत की सजा दी जा सकती है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इस मुद्दे पर ईरान को चेतावनी दे चुके हैं।
‘देरी नहीं होनी चाहिए’
ईरानी सरकारी टेलीविजन द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में मोहसेनी-एजेई ने कहा, “अगर कोई कदम उठाना है तो अभी उठाना होगा। अगर हम इसे दो-तीन महीने बाद करेंगे, तो उसका असर खत्म हो जाएगा। इसलिए जरूरी है कि कार्रवाई तुरंत और तेजी से की जाए।”
प्रदर्शनों में भारी हिंसा
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। यह संख्या दशकों में ईरान में किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों से कहीं अधिक बताई जा रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि इन प्रदर्शनों की तुलना 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता से की जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है।
डर के साए में आम लोग
बुधवार को ईरान में प्रदर्शनों के दौरान मारे गए 100 सुरक्षा बल के जवानों के सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं। कई इलाकों में सादे कपड़ों में सुरक्षाबल अब भी गश्त करते नजर आए। फल-सब्जी खरीद रही दो बच्चों की एक मां ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “गोलीबारी और विरोध प्रदर्शनों की वजह से हम बहुत डरे हुए हैं। कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबरें हैं। हालात थोड़े शांत जरूर हुए हैं, लेकिन स्कूल अब भी बंद हैं और बच्चों को दोबारा स्कूल भेजने में डर लग रहा है।”
‘हथियार सिर्फ सुरक्षा बलों के पास थे’
36 वर्षीय अहमदरेजा तवाकोली ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने तेहरान में एक प्रदर्शन देखा, जहां हालात अचानक युद्ध जैसे हो गए। उन्होंने कहा, “लोग सिर्फ अपनी बात रखने और विरोध करने निकले थे। उनके पास कोई हथियार नहीं था। बंदूकें सिर्फ सुरक्षा बलों के पास थीं, फिर भी पूरे इलाके को युद्ध क्षेत्र बना दिया गया।”



