Vote Chori: अब एक ‘X’ यूजर से भिड़ गया इलेक्शन कमीशन, Fact Check पर दे डाली चुनौती ! FIR तक पहुंचा बवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के “वोट चोरी” और “चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्षपात” के आरोपों के बीच अब सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ राहुल गांधी चुनाव आयोग को धांधली और निष्पक्षता खोने का आरोप लगाकर घेर रहे हैं, तो वहीं चुनाव आयोग उनके दावों को बेबुनियाद और भ्रम फैलाने वाला बता रहा है। इस मुद्दे पर अभी तक किसी ने भी न्यायालय का रुख नहीं किया है, लेकिन सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया में यह बहस बड़े पैमाने पर छिड़ी हुई है।


सोशल मीडिया पोस्ट ने डाली आग में घी

विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक यूजर अंकित मयंक ने एक्स (Twitter) पर दावा किया कि,
“ECI has removed E-Voter Rolls of many states from its website overnight.. Bihar, Haryana, Maharashtra, UP, MP — All removed/Error ❌ Why are ECI & BJP so scared?”

इसके बाद कई अन्य यूजर्स ने भी इसी तरह के पोस्ट करने शुरू कर दिए। एक ने लिखा, “दौड़ दौड़ भागा भागा सा – कुछ ऐसा हाल कर दिया है राहुल गांधी ने चुनाव आयोग का! महाराष्ट्र, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान का e-voter पेज सुबह से डाउन है।”


चुनाव आयोग का पलटवार और फैक्ट चेक

इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने एक्स पर आधिकारिक बयान जारी किया और इसे फेक न्यूज़ बताया। आयोग ने लिखा,
“❌ This is a Fake News #ECIFactCheck ✅ Anyone can download the Electoral Roll for any of 36 States/UTs through this link: https://voters.eci.gov.in/download-eroll

चुनाव आयोग ने साफ किया कि किसी भी राज्य की वोटर लिस्ट वेबसाइट से नहीं हटाई गई है और यह दावा पूरी तरह गलत है।


यूजर की खुली चुनौती

लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। यूजर अंकित मयंक ने चुनाव आयोग के “फेक न्यूज़” वाले बयान पर पलटवार करते हुए लिखा,
“STOP LYING @ECISVEEP E-Voter Rolls for many states were removed yesterday, here is the proof below. I also have screen recording & archives. If you or BJP have guts, file an FIR against me. This is my challenge.”

इस खुली चुनौती ने इस बहस को और गरमा दिया है।


राहुल गांधी बनाम चुनाव आयोग

राहुल गांधी पहले ही चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है और “वोट चोरी” में संलिप्त है। वहीं चुनाव आयोग उनके इन आरोपों को झूठा और भ्रामक बताता आ रहा है।


आगे क्या?

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया में गरमाया हुआ है। देखना होगा कि क्या यह विवाद सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या फिर कोई पक्ष अदालत में जाकर औपचारिक कानूनी लड़ाई छेड़ता है।

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