कल से यूपी में SIR अभियान, 15.44 करोड़ वोटरों की होगी जांच
28 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश में SIR अभियान शुरू होगा। 15.44 करोड़ मतदाताओं की घर-घर जांच की जाएगी। फर्जी नाम हटाए जाएंगे और नई प्रविष्टियां जोड़ी जाएंगी। 9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और 7 फरवरी को अंतिम सूची जारी होगी।

लखनऊ: बिहार में प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को इसकी औपचारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर से यह अभियान राज्यभर में शुरू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य है — मतदाता सूची को अद्यतन करना, फर्जी या मृत मतदाताओं के नाम हटाना और नए पात्र वोटरों को जोड़ना।
बिहार मॉडल पर आधारित दूसरा चरण
SIR का दूसरा चरण बिहार मॉडल पर आधारित है, जहां यह प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है और अंतिम वोटर लिस्ट 30 सितंबर को प्रकाशित की जा चुकी है। अब यह चरण 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा, जिनमें उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, गोवा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुड्डुचेरी, अंडमान–निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।
15.44 करोड़ मतदाताओं की होगी जांच
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 15.44 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। इनकी जांच के लिए 1,62,486 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) नियुक्त किए गए हैं, जिनकी निगरानी 2,445 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और 75 जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। प्रत्येक BLO घर–घर जाकर सत्यापन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई पात्र मतदाता छूट न जाए।
फर्जी मतदाताओं पर कार्रवाई और बूथ सीमा तय
SIR के दौरान संदिग्ध या दोहरी प्रविष्टि वाले नाम हटाए जाएंगे। आयोग ने तय किया है कि प्रत्येक बूथ पर अधिकतम 1000 मतदाताओं का ही पंजीकरण होगा। मतदाता सूची को सोमवार रात से फ्रीज कर दिया जाएगा। BLO हर घर पर तीन बार तक जाकर जानकारी जुटाएंगे और आवश्यक फॉर्म भरवाएंगे।
टाइमलाइन और जरूरी दस्तावेज़
प्रिंटिंग और प्रशिक्षण प्रक्रिया 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद घर–घर सत्यापन 4 नवंबर से 4 दिसंबर के बीच किया जाएगा। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 9 दिसंबर को जारी होगी। नाम जोड़ने या सुधार के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र, पेंशन ऑर्डर, बैंक सर्टिफिकेट या स्थायी निवास प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जाएंगे।
लक्ष्य: पारदर्शिता और सटीकता
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस अभियान से मतदाता सूची में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी। इससे फर्जी मतदान और दोहरी प्रविष्टियों की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों में हर वैध मतदाता को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।



