तमिलनाडु चुनाव में विजय की बड़ी जीत और सरकार बनाने की चुनौती
विजय की टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज। कमल हासन और विपक्षी दलों ने उठाई मांग, जनता के जनादेश का सम्मान करें राज्यपाल। पुडुचेरी के रिसॉर्ट में विधायकों की हलचल, तमिलनाडु की सत्ता को लेकर सस्पेंस बरकरार।

Tamilnadu politics: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी टीवीके ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ कब लेंगे और सरकार गठन का समीकरण क्या होगा। इस बीच टीवीके के नेताओं ने मुस्लिम लीग के नेताओं से मुलाकात कर समर्थन की अपील की है, जिससे राज्य की सियासत और गरमा गई है।
गठबंधन और समर्थन की उलझन
मुस्लिम लीग के नेताओं ने विजय के पक्ष में बयान देते हुए कहा कि राज्यपाल को उन्हें सरकार बनाने के लिए न्योता देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनका पुराना नाता एमके स्टालिन और डीएमके के साथ है। मुस्लिम लीग का कहना है कि अगर स्टालिन को कोई ऐतराज नहीं होता है, तभी वे विजय की पार्टी को समर्थन देने के बारे में सोच सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम लीग ने यह चुनाव डीएमके के ही सिंबल पर लड़ा था।
Tamilnadu politics: कानून व्यवस्था और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स
राज्य में बदलते राजनीतिक हालात के बीच मुख्य सचिव और डीजीपी ने राज्यपाल से मुलाकात कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा दिया है। दूसरी तरफ, अन्नाद्रमुक नेता पलानीस्वामी चेन्नई से पुडुचेरी पहुंच गए हैं। चर्चा है कि उनके करीब 30 से ज्यादा विधायक वहां एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं, जहां आगे की रणनीति पर मंथन किया जा रहा है।
Tamilnadu politics: विपक्ष और कमल हासन का साथ
विजय के समर्थन में अब कई बड़े दल खड़े नजर आ रहे हैं। डीएमके, वीसीके और सीपीआई जैसे दलों का कहना है कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका देना चाहिए। अभिनेता कमल हासन ने भी सोशल मीडिया पर विजय का समर्थन करते हुए कहा कि जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
राज्यपाल के फैसले पर टिकी निगाहें
Tamilnadu politics: विपक्ष का सीधा आरोप है कि राज्यपाल बहुमत के आंकड़े का हवाला देकर विजय को मौका नहीं दे रहे हैं, जो कि लोकतंत्र के खिलाफ है। फिलहाल तमिलनाडु की सत्ता की चाबी राज्यपाल के फैसले और राजनीतिक दलों के आपसी तालमेल पर टिकी है। देखना होगा कि क्या विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले पाएंगे या राज्य की राजनीति कोई नया मोड़ लेगी।
यह भी पढ़ें: जेवर एयरपोर्ट से शुरू होंगी उड़ानें जानिए क्या है पूरा शेड्यूल और तैयारी



