ECI का राहुल गांधी पर ‘ATOM BOMB’ हमला, SC में कांग्रेस का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की PIL, बयानों पर भी रोक!

बिहार में मतदाता सूची की सत्यापन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों और राजनीतिक विवाद के बीच आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। इस मामले ने न केवल निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि कांग्रेस पार्टी को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। कोर्ट में दाखिल एक नई जनहित याचिका (PIL) में कांग्रेस का पंजीकरण रद्द करने तक की मांग की गई है।


65 लाख नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

14 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि बिहार की वोटर लिस्ट से हटाए गए 65 लाख नामों को कारण सहित वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाए। आदेश के बाद ECI ने हलफनामा दायर कर कोर्ट को सूचित किया कि सूची वेबसाइट पर जारी कर दी गई है। आयोग के अनुसार, यह जानकारी बिहार के सभी 38 जिलों की निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर उपलब्ध है।


वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन का पहला चरण पूरा

बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची जारी कर दी गई थी। इस दौरान बूथ स्तर अधिकारियों ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ लोगों ने अपने नाम की पुष्टि कर फॉर्म जमा किया।
वहीं, दावा और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 1 सितंबर 2025 तय की गई है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए विशेष कैंप भी लगाए हैं ताकि लोग आसानी से अपने नाम की पुष्टि या सुधार करवा सकें।


कांग्रेस का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग वाली याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई जनहित याचिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राजनीतिक दल के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘वोट चोरी’ के नाम पर निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान हुआ है।
याचिका में इन नेताओं के खिलाफ एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर जांच कराने की भी मांग की गई है।


कांग्रेस नेताओं के बयानों पर रोक की भी मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब तक कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी प्रतिनिधियों के सार्वजनिक बयान और भाषणों पर अंतरिम रोक लगाई जाए। साथ ही ऐसी किसी भी सामग्री के प्रकाशन पर भी रोक लगाने की मांग की गई है, जो ECI की निष्पक्षता और अधिकार को कमजोर करती हो।


ECI ने दी अपनी सफाई

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में स्पष्ट किया है कि उसने कोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई की है। आयोग ने कहा कि हटाए गए 65 लाख नामों की पूरी सूची वेबसाइट पर डाल दी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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