तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर, अपने ही गढ़ कोलाथुर से चुनाव हारे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन

तमिलनाडु में बड़ा उलटफेर, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपने ही गढ़ कोलाथुर से चुनाव हारे विजय की पार्टी टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने दिग्गज नेता स्टालिन को दी पटखनी कोलाथुर सीट बनने के बाद पहली बार किसी दूसरे दल ने दर्ज की यहां बड़ी जीत

Mk stalin defeat: तमिलनाडु की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से हार का सामना करना पड़ा है। कोलाथुर सीट को स्टालिन का सबसे मजबूत किला माना जाता था, जहां से उन्होंने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू ने उन्हें करारी शिकस्त दी है। बता दें कि पिछले चुनाव में स्टालिन ने यहां बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गए।

Mk stalin defeat: पुराने साथी ने ही दी पटखनी

स्टालिन को हराने वाले वीएस बाबू कभी उनके बेहद करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। वे पूर्व में डीएमके के विधायक भी रह चुके हैं और साल 2011 में जब स्टालिन पहली बार इस सीट से खड़े हुए थे, तब वीएस बाबू ही उनके चुनाव इंचार्ज थे। डीएमके छोड़ने के बाद वे कुछ समय तक एआईएडीएमके में रहे और फिर इसी साल फरवरी में विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हो गए थे। अनुभवी नेता होने के नाते उन्हें क्षेत्र की नब्ज का पता था, जिसका फायदा उन्हें इस चुनाव में मिला।

पहली बार ढहा कोलाथुर का किला

Mk stalin defeat: कोलाथुर विधानसभा सीट का इतिहास एमके स्टालिन के नाम से ही जुड़ा रहा है। साल 2011 में जब इस सीट का गठन हुआ था, तब से लेकर अब तक स्टालिन ही यहां के इकलौते विधायक रहे थे। दिग्गज नेता एम. करुणानिधि की विरासत संभालने वाले स्टालिन के लिए यह हार एक बड़े झटके के तौर पर देखी जा रही है। करीब डेढ़ दशक बाद इस सीट पर किसी नए चेहरे का कब्जा होने जा रहा है, जिसने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।

 

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