लोकपाल के 5 करोड़ की BMW कारों पर सियासी तूफान, विपक्ष बोला – अब ‘शौकपाल’ हो गया है लोकपाल
लोकपाल द्वारा करीब 5 करोड़ रुपये की 7 बीएमडब्ल्यू कारें खरीदने के फैसले से सियासी घमासान मच गया है। विपक्ष ने इसे फिजूलखर्ची बताते हुए लोकपाल को ‘शौकपाल’ कहा। नेताओं ने पूछा—भ्रष्टाचार पर नजर रखने वालों को लग्जरी गाड़ियों की क्या जरूरत?

नई दिल्ली: भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था लोकपाल इन दिनों विवादों में है। वजह है—बीएमडब्ल्यू 330Li एम स्पोर्ट (लॉन्ग व्हीलबेस, सफेद रंग) की 7 लग्जरी गाड़ियों की खरीद का टेंडर। हर गाड़ी की कीमत करीब ₹69.5 लाख बताई जा रही है और कुल लागत करीब ₹5 करोड़ तक पहुंच रही है।
ये गाड़ियां लोकपाल के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) ए.एम. खानविलकर और छह अन्य सदस्यों के लिए खरीदी जानी हैं। यह टेंडर 16 अक्टूबर को जारी हुआ था। इसके लिए ₹10 लाख की ईएमडी (जमानत राशि) रखी गई है और 6 नवंबर तक बोली जमा करनी है। गाड़ियां ऑर्डर मिलने के बाद 15 से 30 दिन में सप्लाई करनी होंगी।
विपक्ष का हमला तेज
इस खरीद को लेकर विपक्षी दलों ने लोकपाल पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “जिन्होंने कभी मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ ईमानदारी का झूठा झंडा उठाया था, अब उनकी असलियत सामने है।”
पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया, “जब सुप्रीम कोर्ट के जज मामूली गाड़ियों में चलते हैं, तो लोकपाल को बीएमडब्ल्यू की क्या जरूरत?” अभिषेक मनु सिंघवी ने व्यंग्य करते हुए कहा, “8703 शिकायतें, सिर्फ 24 जांचें, 6 अभियोजन स्वीकृति और अब BMW! ये संस्था ‘पैंथर’ नहीं, ‘पूडल’ बन गई है।” टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने कहा कि “लोकपाल का सालाना बजट ₹44.32 करोड़ है, और यह खरीद उसका 10% हिस्सा खा जाएगी।” वहीं प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना–यूबीटी) ने तंज कसा, “देशी की बात करने वाली सरकार अब विदेशी गाड़ियां खरीद रही है।”
ट्रेनिंग भी होगी मुफ्त
टेंडर में यह भी कहा गया है कि विक्रेता को 7 दिन की मुफ्त ट्रेनिंग देनी होगी। इसमें ड्राइवरों को गाड़ियों के सभी फीचर्स, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन हैंडलिंग की जानकारी दी जाएगी। यह ट्रेनिंग डिलीवरी के 15 दिन के भीतर पूरी करनी होगी।
ईमानदारी या ऐशोआराम?
विपक्ष के हमलों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था को खुद अपनी सादगी का उदाहरण देना चाहिए था। कम जांच और ज्यादा खर्च के आरोपों ने लोकपाल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



