जैसलमेर बस अग्निकांड का एक और वीडियो वायरल, दहला देने वाला दृश्य.. सामने आई हादसे की पूरी कहानी!

कभी-कभी ज़िंदगी इतनी बेरहम हो जाती है कि सांस लेने का मौका भी नहीं देती।
राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार दोपहर हुई बस अग्निकांड की त्रासदी ऐसी ही एक घटना है — जिसमें 20 लोग जिंदा जल गए, कई गंभीर रूप से झुलस गए और कई परिवारों की खुशियाँ राख में बदल गईं।
आज, 24 घंटे बाद भी, बस में जले शरीरों की पहचान नहीं हो पाई है। कई परिवार अब डीएनए टेस्ट की लाइन में खड़े हैं, ताकि किसी तरह अपने अपनों को आखिरी बार पहचान सकें।
धधकती बस, चीखें और मौत का सन्नाटा
यह मंगलवार दोपहर 3.30 बजे की बात है।
जैसलमेर से जोधपुर जा रही एसी स्लीपर बस लोंगेवाला हाईवे पर अचानक आग की लपटों में घिर गई।
किसी को समझ नहीं आया कि आग लगी कैसे।
कुछ यात्रियों ने भागकर जान बचाई, लेकिन कई लोग बस के अंदर ही फंस गए।
बस के एक ही दरवाजे ने मौत का जाल बुन दिया —
“जो आगे बैठे थे वो निकल गए… बाकी बस के साथ जल गए।”
20 से ज़्यादा जानें गईं, 5 अब भी वेंटिलेटर पर
जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह भाटी ने बताया —
“अब तक 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
तीन मरीज पहले से वेंटिलेटर पर थे, और बुधवार सुबह दो और मरीजों की हालत बिगड़ने पर उन्हें भी वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया है।”
डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों में से कई के शरीर 70% तक झुलस चुके हैं।
🚨 Terribly tragic!
20 people burnt alive after AC sleeper bus caught fire on Jaisalmer–Jodhpur Highway
Suspected short circuit in AC unit. Gas & diesel fueled the blaze
Only one exit, no safety tools. Passengers were trapped, struggled to escape as the only exit was locked… pic.twitter.com/sDHoLK67ro
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) October 15, 2025
A bus traveling from Jaisalmer to Jodhpur caught fire near Thaiyat village this afternoon. 15 passengers, including 3 children and 4 women, suffered burn injuries. The bus had 57 people onboard.@santwana99 @jayanthjacob @NewIndianXpress @TheMornStandard pic.twitter.com/FPAhUjqqi8
— Rajesh Asnani (@asnaniraajesh) October 14, 2025
परिजन डीएनए कतार में, पहचान अब नमूनों पर टिकी
इस अग्निकांड के बाद जोधपुर और जैसलमेर के हॉस्पिटल में डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।
लेकिन पहचान की इस प्रक्रिया ने परिवारों को अंदर तक तोड़ दिया है।
कई लोग अपने बेटे, बेटी या पिता को पहचान नहीं पा रहे —
क्योंकि चेहरे अब राख हो चुके हैं।
डॉ. फतेह सिंह भाटी ने कहा,
“डीएनए वेरिफिकेशन संवेदनशील प्रक्रिया है। थोड़ा समय लगता है, लेकिन सटीकता बहुत ज़रूरी है।”
“हमें बस राख दी जा रही है” — परिवारों का दर्द
बुधवार सुबह हादसे में मारे गए सेना के जवान के परिवार ने पहचान की प्रक्रिया पर नाराज़गी जताई।
जोधपुर के एक और परिवार ने कहा —
“हम 18 घंटे से यहां हैं, कोई नहीं बता रहा हमारा बेटा जिंदा है या नहीं। बस हमें राख दी जा रही है।”
यह वाक्य सुनने वालों की रूह तक हिला देता है।
पटाखे या शॉर्ट सर्किट? कारणों पर उलझी जांच
अब तक आग लगने के कई कारण सामने आए हैं।
शुरुआत में कहा गया कि बस में शॉर्ट सर्किट हुआ,
फिर दावा किया गया कि एसी के कंप्रेशर पाइप फटने से आग लगी।
लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की डिग्गी में पटाखे रखे गए थे,
जो गर्मी में भड़क उठे और आग ने पूरे बस को निगल लिया।
फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीमें मौके की जांच कर रही हैं।
प्रधानमंत्री की संवेदना, मृतकों के परिवार को 2 लाख की मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर शोक जताते हुए लिखा —
“राजस्थान के जैसलमेर में हुई दुर्घटना से जान-माल की हानि से मन व्यथित है।”
उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख, और घायलों को ₹50,000 की सहायता की घोषणा की है।
मंत्री बोले — “कुछ तो पूरी तरह खाक हो गए”
राजस्थान के मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बताया —
“पीछे से धमाके की आवाज आई। शायद एसी का कंप्रेशर फटा।
गैस और डीजल के मिल जाने से आग ने पलभर में बस को निगल लिया।
एक ही दरवाज़ा था… लोग बाहर नहीं निकल पाए।
कुछ तो पूरी तरह खाक हो गए, पहचान पाना असंभव है।”
दिल दहला देने वाला वीडियो: जब जिंदगी राख में तब्दील हुई
घटना के बाद जो 1 मिनट 24 सेकंड का वीडियो सामने आया है,
वह इस हादसे की भयावहता को शब्दों से परे दिखाता है।
वीडियो में बस जल रही है, लोग बदहवास भाग रहे हैं,
कोई पानी मांग रहा है, तो कोई अपने परिजन का नाम पुकार रहा है।
एक युवती घायल महिला को पानी पिलाती दिखती है,
जबकि पीछे से कोई चिल्लाता है —
“इनको एम्बुलेंस में डालो यार…”
वीडियो देखते ही दिल बैठ जाता है।
जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल, राख में ढूंढते रिश्तेदार
कुछ यात्री जो बच निकले, अब अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
वहीं, जिनकी जान चली गई, उनके घरों में सन्नाटा पसरा है।
कई माताएँ अब भी अस्पताल के बाहर बैठी हैं,
हाथों में राख का डिब्बा और आंखों में एक ही सवाल — “क्या यही मेरा बेटा है?”



