Iran crisis: तेहरान में बड़ा बदलाव, अलीरेजा अराफी बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर

खामेनेई की मौत के बाद अलीरेजा अराफी बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स से जुड़े रहे हैं अराफी जंग के बीच ईरान की राजनीति और धार्मिक नीतियों में बदलाव के संकेत

Iran news: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव हुआ है। इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद अब Alireza Arafi को देश का नया अंतरिम सुप्रीम लीडर बनाया गया है। अराफी 1959 में याज्द प्रांत के मेयबोद शहर में जन्मे एक शिया धर्मगुरु हैं। वे इस समय गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य हैं, साथ ही बसिज के प्रमुख भी रह चुके हैं। फिलहाल उन्हें अस्थायी तौर पर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स बाद में करेगी।

 

कई अहम संस्थानों में निभा चुके हैं बड़ी जिम्मेदारी

अराफी लंबे समय से ईरान की धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के पूर्व चेयरमैन, कोम के शुक्रवार इमाम और ईरान के सेमिनरी सिस्टम के प्रमुख रह चुके हैं। इसके अलावा वे इंटरनेशनल सेंटर फॉर इस्लामिक साइंसेज के अध्यक्ष, यूनिवर्सिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख और सुप्रीम काउंसिल ऑफ कल्चरल रेवोल्यूशन के सदस्य भी रहे हैं। धार्मिक शिक्षा और विचारधारा के क्षेत्र में उनका प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है।

 

5 करोड़ लोगों को शिया धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने का दावा

2009 से 2018 तक अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में अपने कार्यकाल के दौरान अराफी ने दावा किया था कि उन्होंने करीब 5 करोड़ लोगों को शिया इस्लाम की विचारधारा से जोड़ा। यह संस्थान ईरान की धार्मिक सोच को दुनिया भर में फैलाने का बड़ा केंद्र माना जाता है।

 

सख्त विचारों के लिए जाने जाते हैं अराफी

अराफी अपने कड़े धार्मिक रुख के लिए पहचाने जाते हैं। वे नास्तिकता और ईसाई धर्म, खासकर ईरान में चल रहे घरेलू चर्चों के आलोचक रहे हैं। धार्मिक नीतियों और सेमिनरी सिस्टम में सुधार की बात भी वे पहले उठाते रहे हैं। उनके अंतरिम सुप्रीम लीडर बनने के बाद माना जा रहा है कि ईरान की राजनीतिक और धार्मिक नीतियों में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 

अराफी को ही क्यों मिली जिम्मेदारी?

ईरान के संविधान के आर्टिकल 111 के तहत सुप्रीम लीडर के निधन की स्थिति में अस्थायी लीडरशिप काउंसिल बनाई जाती है। इस तीन सदस्यीय परिषद में राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल का एक ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल होता है। अराफी गार्जियन काउंसिल के ज्यूरिस्ट सदस्य हैं और खामेनेई के करीबी माने जाते थे। प्रशासनिक अनुभव, धार्मिक पकड़ और सत्ता तंत्र में उनकी मजबूत स्थिति को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। जंग जैसे हालात में नेतृत्व की निरंतरता और व्यवस्था की स्थिरता बनाए रखना इस फैसले की बड़ी वजह माना जा रहा है।

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