बड़ी खबर: यूपी की धांकड़ SP ‘आरती सिंह’ ने कोर्ट में मांगी माफ़ी, फिर HC का एक्शन – क्या है हैबियस कॉर्पस याचिका?

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (SP) आरती सिंह की पेशी हुई। मामला एक हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फर्रुखाबाद की पुलिस ने दो लोगों को करीब सात दिन तक गैर-कानूनी हिरासत में रखा। अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया।
क्या है हैबियस कॉर्पस याचिका?
“हैबियस कॉर्पस” एक संवैधानिक अधिकार और याचिका है, जो सुनिश्चित करती है कि किसी व्यक्ति को ग़ैर-कानूनी तरीके से गिरफ़्तार या हिरासत में नहीं रखा जाए।
अगर कोई सरकारी एजेंसी या पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वैध कारण या निर्धारित समय से अधिक हिरासत में रखती है, तो उस व्यक्ति, उसके परिवार या दोस्त को कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल करने का अधिकार होता है।
कोर्ट पुलिस को तीन तरह के आदेश दे सकती है—
1️⃣ हिरासत में रखे व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाए।
2️⃣ हिरासत का कारण बताया जाए।
3️⃣ अगर कारण गैर-कानूनी हो, तो व्यक्ति को तुरंत रिहा किया जाए।
हाईकोर्ट में SP आरती सिंह ने हलफनामा देकर मांगी माफी
हैबियस कॉर्पस केस की सुनवाई के दौरान SP आरती सिंह ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की आंतरिक जांच कराई जाएगी और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया है और अगली सुनवाई की तारीख़ बाद में तय की जाएगी।
प्रीति यादव की याचिका से शुरू हुआ विवाद
फर्रुखाबाद निवासी प्रीति यादव की ओर से एडवोकेट संतोष पांडे ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की थी।
आरोप है कि 8 सितंबर की रात करीब नौ बजे फर्रुखाबाद के कायमगंज थाने की पुलिस टीम, जिसमें थाना प्रभारी अनुराग मिश्रा और सीओ समेत कई पुलिसकर्मी शामिल थे, प्रीति के घर में जबरन घुस गई।
टीम SP फतेहगढ़ आरती सिंह से लगातार संपर्क में थी।
पुलिस ने प्रीति यादव के परिवार के दो सदस्यों को ग़ैर-कानूनी रूप से एक सप्ताह तक हिरासत में रखा और 14 सितंबर की रात 11 बजे उन्हें रिहा किया।
रिहाई से पहले पुलिस ने दबाव डालकर एक लिखित बयान लिया कि वे कोई मुकदमा नहीं करेंगे। पुलिस ने यही बयान हाईकोर्ट में पेश किया, लेकिन अदालत ने पुलिस का पक्ष मानने से इनकार कर दिया।
एसपी-सीओ-एसएचओ को किया था तलब
हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को आदेश जारी करते हुए कहा कि 14 अक्टूबर तक दोपहर 2 बजे तक SP फतेहगढ़, CO कायमगंज और SHO कायमगंज को अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा।
इसके बाद 11 अक्टूबर को फर्रुखाबाद के वकील अवधेश मिश्र के घर पर पुलिस पहुंची और तोड़फोड़ की।
परिवार के लोगों को पीटा गया, सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए और डीवीआर उठा ले जाया गया।
पुलिस को शक था कि अवधेश मिश्रा ने ही प्रीति यादव को कोर्ट में रिट दाखिल करने में मदद की थी।
वकील अवधेश मिश्र और उनके बेटे की कोर्ट परिसर से गिरफ्तारी
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब मंगलवार शाम करीब 4 बजे हाईकोर्ट परिसर के बाहर फर्रुखाबाद पुलिस ने अवधेश मिश्र और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में तत्काल यह मामला रखा गया, जिसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप से दोनों की रिहाई संभव हो सकी।
कोर्ट ने माना प्रथम दृष्टया अवमानना
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यवाही को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना।
SP आरती सिंह और उनकी टीम से जब जवाब मांगा गया तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं, जिस पर अदालत ने उन्हें प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी माना।
एसपी ने माफी मांगते हुए हलफनामा दाखिल किया, जिसके बाद कोर्ट ने फिलहाल निर्णय सुरक्षित रख लिया।
कौन हैं IPS आरती सिंह?
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2017 बैच की आईपीएस अधिकारी।
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जन्म: 18 सितंबर 1984, सिंगरौली (मध्य प्रदेश)
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शिक्षा: बीकॉम, एमबीए
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2015 में शादी IPS अनिरुद्ध सिंह से हुई।
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2016 में PCS परीक्षा पास कर बनीं BDO (मेरठ)।
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2017 में UPSC क्रैक कर बनीं IPS अधिकारी।
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2019 में पहली पोस्टिंग वाराणसी में मिली।
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2020 में मथुरा जिले में एसपी रहीं।
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अप्रैल 2024 में फर्रुखाबाद की SP बनीं।
आरती सिंह पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। बनारस पुलिस कमिश्नरेट में तैनाती के दौरान मकान मालिक को किराया न देने का आरोप लगा था, जिसकी शिकायत DGP तक पहुंची थी।
क्या कहता है कानून और इसका असर
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वैध आधार के हिरासत में रखती है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार) का उल्लंघन है।
ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस ही एकमात्र और सबसे तेज़ उपाय है।
यह केस न केवल फर्रुखाबाद पुलिस की जवाबदेही को उजागर करता है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।



