बड़ी खबर: उग्रवादी संगठन से जुड़े नेता ने BJP को दी पटकनी, 21 सीटों से जीत.. 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, भाजपा के गढ़ में सेंध!

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पिछले एक दशक से लगातार जारी जीत की लय पर इस बार ब्रेक लग गया। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) चुनाव में BJP को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, जबकि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया। इस नतीजे के पीछे एक बड़ा नाम सामने आया—हाग्रामा मोहिलारी। आइए जानते हैं कौन हैं ये नेता और कैसे उन्होंने असम की राजनीति की दिशा ही बदल दी।

10 साल की BJP लहर को झटका

BTC चुनावों को असम विधानसभा चुनाव 2026 का सेमीफाइनल माना जा रहा था। यहां BJP का दबदबा लगातार बढ़ रहा था, लेकिन इस बार समीकरण बदल गए। 40 सीटों वाली परिषद में BPF ने 28 सीटें हासिल कीं, जबकि BJP केवल 5 सीटों तक सिमट गई। वहीं, UPPL को 7 सीटें मिलीं। यह नतीजा BJP के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

हाग्रामा मोहिलारी: विद्रोही से नेता तक का सफर

हाग्रामा मोहिलारी राजनीति में आने से पहले उग्रवादी संगठन बोडोलैंड लिबरेशन टाइगर्स (BLT) से जुड़े थे। 2003 में हथियार डालने के बाद उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी और 2005 में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) की स्थापना की। मोहिलारी BTC के पहले मुख्य कार्यकारी सदस्य (CEM) भी बने और कई बार इस पद पर रहे।

रणनीति और गठबंधन की ताकत

मोहिलारी ने चुनाव से पहले साफ कर दिया था कि BPF किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन करने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर वे BJP और UPPL दोनों से हाथ मिला सकते हैं। यह लचीलापन और रणनीतिक सोच उनकी जीत का बड़ा कारण बना।

नतीजे और राजनीतिक संदेश

  • BPF: 28 सीटें

  • BJP: 5 सीटें

  • UPPL: 7 सीटें

यह नतीजे दर्शाते हैं कि जनता ने BJP को इस बार मौका कम दिया और स्थानीय नेतृत्व पर भरोसा जताया। BPF की यह जीत न केवल असम की क्षेत्रीय राजनीति को बदल रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर BJP की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर रही है।

हिमंत बिस्वा सरमा की भूमिका

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद हाग्रामा मोहिलारी से मुलाकात की और गठबंधन की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने संकेत दिए कि अगर BJP को समर्थन चाहिए तो BPF आगे आ सकती है। वहीं, मोहिलारी ने भी कहा कि वे किसी भी सहयोग का स्वागत करेंगे, लेकिन मजबूरी में कोई गठबंधन नहीं करेंगे।

भविष्य की राजनीति पर असर

हाग्रामा मोहिलारी और BPF की इस जीत से साफ हो गया है कि असम की राजनीति में अब स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम होने वाली है। BJP के लिए यह चुनाव एक बड़ा सबक है कि केवल राष्ट्रीय मुद्दों के दम पर सफलता पाना आसान नहीं होगा।

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