9 साल बाद PM Modi ने मानी Rahul Gandhi की बात! GST पर वायरल हुआ 9 साल पुराना ट्वीट – देखें Exclusive रिपोर्ट”

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को देश के सबसे बड़े टैक्स सुधार के रूप में 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। लेकिन इसकी दरों और जटिल ढांचे को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। 4 स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) वाले स्ट्रक्चर की वजह से अक्सर इसे “गब्बर सिंह टैक्स” भी कहा गया। अब, 3 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि GST को सरल बनाकर सिर्फ दो स्लैब — 5% और 18% कर दिया गया है।
यह वही मांग है, जिस पर राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी 2016 से ही ज़ोर देती आ रही थी।

राहुल गांधी ने क्या कहा था? (18 अक्टूबर 2016)
GST लागू होने से पहले ही राहुल गांधी ने ट्विटर (अब X) पर कई ट्वीट्स कर अपनी पोज़िशन साफ की थी।
उन्होंने लिखा था:
“As the GST Council begins its deliberations today I want to stress again that an 18% cap on the GST rate is in everybody’s interest.”
एक और ट्वीट में कहा:
“Since 2005, Congress Party has wanted a GST that is pro-industry, pro-trade and non-inflationary for common people, especially the poor.”
और तीसरे ट्वीट में:
“As an indirect tax GST affects rich & poor alike. I urge GST Council to keep the rate at 18% or lower so that the poor are not unduly burdened!”
👉 यानी साफ था कि कांग्रेस की मांग रही है कि GST की दर 18% से ज़्यादा न हो, ताकि ये टैक्स अमीर-गरीब सभी पर बराबर असर डाले और महंगाई न बढ़े।
सरकार तुम्हारी, सिस्टम हमारा ✊ pic.twitter.com/AXYIoIO0Ew
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) September 4, 2025
उस समय सरकार की प्रतिक्रिया
2017 में GST लागू करते समय मोदी सरकार ने इसे 4 स्लैब्स (5%, 12%, 18%, 28%) में बांटा।
कांग्रेस ने इसे “जटिल और बोझिल” बताया। राहुल गांधी ने संसद में और बाद में चुनावी भाषणों में इसे बार-बार “गब्बर सिंह टैक्स” कहा।
उनका आरोप था कि:
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छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर पर अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है।
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रोजमर्रा के सामानों पर भी ज़्यादा टैक्स लगाकर आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
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GST को सरल बनाने के बजाय इसे इतना उलझा दिया गया कि आम दुकानदार के लिए कंप्लायंस भारी पड़ने लगा।
अब मोदी सरकार का फैसला (3 सितंबर 2025)
करीब 9 साल बाद, सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए GST को सरल बना दिया।
- अब सिर्फ दो स्लैब — 5% और 18% होंगे।
- ज़रूरी सामान (रोटी, दूध, पराठा, छेना, दवाइयाँ) GST-फ्री या 5% स्लैब में।
- कार, AC, टीवी जैसे प्रोडक्ट्स अब 18% स्लैब में, यानी पहले से सस्ते।
- तंबाकू और लग्जरी सामान पर 28% की जगह अब 40% GST, ताकि इन्हें हतोत्साहित किया जा सके।
- नए नियम 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे।
राहुल गांधी की मांग और आज का फैसला – समानता
अगर तुलना करें तो:
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राहुल गांधी (2016): “GST 18% से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।”
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मोदी सरकार (2025): “अब 18% को मैक्सिमम रखा गया है, बाकी सब घटा दिया गया।”
यानी सरकार ने 9 साल बाद कांग्रेस की उसी लाइन को अपनाया, जिसे पहले “अवास्तविक” कहकर नकार दिया गया था।
आर्थिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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रोजमर्रा की चीज़ें सस्ती होने से महंगाई पर काबू मिलेगा।
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छोटे व्यापारी और MSME सेक्टर को बड़ी राहत।
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किसानों के लिए ट्रैक्टर और मशीनरी पर टैक्स घटने से खेती का खर्च कम होगा।
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राजस्व पर शुरुआती झटका (SBI रिसर्च के मुताबिक 85,000 करोड़ का घाटा), लेकिन खपत बढ़ने से लंबे समय में फायदा होगा।
राजनीतिक संदेश
यह फैसला केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक मायनों में भी अहम है।
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राहुल गांधी की पुरानी पोज़िशन को सही साबित करता है।
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कांग्रेस अब इसे “देखा, हम सही थे” वाली लाइन में पेश करेगी।
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बीजेपी इसे “मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक” बताकर जनता को राहत देने वाला कदम दिखाएगी।
GST सुधार की यह नई घोषणा न केवल आम जनता को राहत देगी, बल्कि राजनीतिक बहस को भी गरमा देगी। सवाल यह उठेगा कि जब कांग्रेस 2016 से यही मांग कर रही थी, तो मोदी सरकार ने इसे तब क्यों नहीं माना? क्या आज की परिस्थितियों ने सरकार को मजबूर किया, या यह स्वीकार करना पड़ा कि राहुल गांधी की उस समय की बात सही थी?
एक बात तो साफ है — GST 2.0, राहुल गांधी की 2016 की कल्पना के काफी करीब है।
नोट: इस खबर में जिस ट्वीट का ज़िक्र किया गया है, उसका स्क्रीनशॉट कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। NewsNasha इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। पाठकों से अपील है कि इस जानकारी को केवल सार्वजनिक दावे के रूप में देखें।



