Drugs network: NCB ने देशव्यापी डार्कनेट ड्रग नेटवर्क “टीम कल्कि” का पर्दाफाश किया
एनसीबी ने डार्कनेट ड्रग नेटवर्क “टीम कल्कि” का भंडाफोड़ किया। 2,338 LSD ब्लॉटर्स, 160 MDMA गोलियां और 3.6 किलो लिक्विड MDMA बरामद। नेटवर्क पूरे भारत में सक्रिय और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चैन से जुड़ा था।

नई दिल्ली: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक पैन-इंडिया ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क “टीम कल्कि” का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क जनवरी 2025 से डार्कनेट प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप “सेशन” के जरिए सक्रिय था। पिछले तीन महीनों की जांच और खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली में ऑपरेशन चलाकर इस पूरे नेटवर्क को पकड़ लिया।
बरामद हुई ड्रग्स की खेप
ऑपरेशन में एनसीबी ने कुल 13 घरेलू और 2 अंतरराष्ट्रीय पार्सल से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किए। इसमें शामिल हैं: 2,338 LSD ब्लॉटर्स,160 MDMA (एक्स्टेसी) गोलियां (कुल 77.517 ग्राम), 73.612 ग्राम चरस, 3.642 ग्राम एम्फेटामाइन, 3.6 किलोग्राम लिक्विड MDMA, यह बरामदगी इस बात का सबूत है कि ड्रग तस्कर अब मादक और साइकोट्रॉपिक पदार्थों की आपूर्ति के लिए तेजी से डार्कनेट और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आरोपी और उनका नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि “टीम कल्कि” को अनुराग ठाकुर और उनके सहयोगी विकास राठी चला रहे थे। दोनों आदतन अपराधी हैं और पहले भी NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुके हैं। विकास राठी पहले चरस तस्करी के मामले में तिहाड़ जेल में थे। अनुराग ठाकुर मेथाम्फेटामाइन तस्करी मामले में जेल में रहे। तिहाड़ जेल में एक-दूसरे से मिलने के बाद दोनों ने मिलकर डार्कनेट नेटवर्क शुरू किया। डार्कनेट और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल, आरोपी शुरुआत में डार्क वेब फोरम “ड्रेड” पर सक्रिय थे। उनके वेंडर अकाउंट को चार-स्टार रेटिंग मिली थी, जो यह दर्शाती है कि उन्होंने बड़ी संख्या में सफल ऑर्डर पूरे किए। इसके बाद उन्होंने एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप “सेशन” के जरिए भी ड्रग्स की बिक्री शुरू कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि उनका नेटवर्क नीदरलैंड, पोलैंड और जर्मनी जैसे देशों से LSD और MDMA मंगाता था।
पार्सल और डिलीवरी का तरीका
ग्राहकों से ऑर्डर मिलने के बाद: 1. एक आरोपी पैकेजिंग और पार्सल भेजने का काम संभालता। 2. “डेड ड्रॉप” तकनीक का इस्तेमाल होता, पार्सल पहले से तय स्थानों पर रखे जाते और खरीदार को वहां से उठाने को कहा जाता। 3. अन्य स्थानों पर पार्सल स्पीड पोस्ट और कूरियर सेवाओं से भेजे जाते। हर खेप के लिए अलग-अलग कूरियर या ऑफिस का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि पकड़ में आने का खतरा कम हो। जनवरी 2025 से अब तक इस नेटवर्क ने 1,000 से अधिक पार्सल भेजे जाने का अनुमान है।
भुगतान और क्रिप्टोकरेंसी
आरोपी मोनेरो और USDT जैसे अनहोस्टेड वॉलेट के जरिए भुगतान लेते थे। रकम को कई इंटरमीडियरी वॉलेट के जरिए घुमाया जाता और लगभग 10% चार्ज देकर USDT में बदलकर कोल्ड वॉलेट में स्टोर किया जाता था।
आगे की कार्रवाई
एनसीबी अब नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और वित्तीय लेन-देन का पता लगा रही है। साथ ही “टीम कल्कि” के पूरे ऑपरेशनल सिस्टम को खत्म करने के प्रयास जारी हैं। यह कार्रवाई डार्कनेट और सिंथेटिक ड्रग तस्करी के खिलाफ एनसीबी के लगातार देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। इससे पहले भी ऑपरेशन केटामेलन (2025) और ऑपरेशन जाम्बाडा (2023) जैसे बड़े अभियान चलाए गए थे।



