Digital Arrest Fraud: पुणे की बुजुर्ग महिला को 99 लाख की चपत, जालसाजों ने चलाया ‘सीतारमण सिग्नेचर’ वाला दांव
वीडियो कॉल पर हुआ पूरा ‘डिजिटल ड्रामा’, फर्जी अधिकारियों और सीतारमण के हस्ताक्षर से बुजुर्ग को बनाया निशाना, 99 लाख की रकम ED और RBI के नाम पर उड़ाई गई।

पुणे: इंटरनेट पर सक्रिय साइबर ठगों ने एक बार फिर ‘Digital Arrest’ के नाम पर बड़ा खेल किया है। इस बार शिकार बनी हैं महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला, जो LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) से रिटायर हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि जालसाजों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर महिला से 99 लाख रुपये ठग लिए।
कैसे रचा गया डिजिटल जाल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पूरा मामला अक्टूबर का है। पुणे के कोथरूड इलाके में रहने वाली महिला को एक अज्ञात शख्स का फोन आया, जिसने खुद को डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी का अधिकारी बताया। उसने कहा कि महिला के आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर संदिग्ध लेन-देन में इस्तेमाल हो रहा है।
इसके बाद बातचीत वीडियो कॉल पर हुई, जहाँ एक अन्य व्यक्ति ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जॉर्ज मैथ्यू बताया। उसने महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हुए बैंक अकाउंट फ्रीज करने की धमकी दी। बातचीत के दौरान ठगों ने निर्मला सीतारमण के फर्जी सिग्नेचर वाला एक आधिकारिक दस्तावेज भी दिखाया।
‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ट्रांसफर कराए 99 लाख
ठगों ने महिला को कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा जाएगा और उन्हें अपनी रकम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के खाते में जमा करनी होगी। भरोसा करते हुए महिला ने अलग-अलग खातों में करीब ₹99 लाख ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, जालसाजों ने ED (Enforcement Directorate) की फर्जी रसीदें दिखाकर भरोसा और मजबूत किया।
जब टूटी हकीकत की दीवार
कुछ दिनों बाद जब महिला ने दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी नंबर बंद निकले। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुणे सिटी साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के नाम का इस्तेमाल कर ठगी करना “बेहद चिंताजनक ट्रेंड” बन गया है।
क्या है Digital Arrest?
‘डिजिटल अरेस्ट’ एक नई साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें जालसाज खुद को सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी बताकर किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर “कथित जांच” में बंद कर देते हैं। डर और दबाव बनाकर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं।



