दिवाली पर घुटा दिल्ली का दम, पटाखों ने फिर बिगाड़ी हवा की हालत
दिवाली पर दिल्ली की हवा एक बार फिर प्रदूषण से जहरीली हो गई। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बावजूद लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े, जिससे AQI 345 तक पहुंच गया। मुख्यमंत्री की अपील का असर नहीं दिखा। विशेषज्ञों ने अगले दो दिनों में स्थिति के और बिगड़ने की चेतावनी दी है।

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली समेत देशभर में सोमवार (20 अक्टूबर) को दिवाली का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। शहर की सड़कों और इमारतों को रंग–बिरंगी लाइटों से सजाया गया, घर–घर में दीये जलाए गए और मंदिरों में पूजा–अर्चना की गई। लेकिन त्योहार की चमक के बीच दिल्ली की हवा में घुल गया धुआं। सुप्रीम कोर्ट से पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पटाखों के सीमित उपयोग की अनुमति मिलने के बाद लोगों ने जमकर आतिशबाजी की, जिससे वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ा।
AQI 345 के पार, हालात ‘बहुत खराब’ श्रेणी में
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सोमवार को 345 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। रविवार को यह आंकड़ा 326 था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली की रात फोड़े गए पटाखों और ठंडी हवा के कारण मंगलवार और बुधवार को स्थिति और बिगड़ सकती है तथा हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक प्रतिदिन शाम चार बजे जारी किया जाता है, जो राजधानी के पर्यावरण की स्थिति को दर्शाता है।
सीएम रेखा गुप्ता की अपील बेअसर
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने त्योहार से पहले लोगों से अपील की थी कि वे केवल हरित पटाखों का उपयोग करें और शहर को प्रदूषण से बचाने में सहयोग दें। उन्होंने नागरिकों से दीये जलाने, रंगोली बनाने और मिठाइयां बांटकर पारंपरिक तरीके से दिवाली मनाने की सलाह दी थी। लेकिन अपील का खास असर नहीं दिखा और देर रात तक कई इलाकों में पटाखों की आवाज गूंजती रही।
सरकार का दावा—‘प्रदूषण कम करने के लिए काम जारी’
बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले साल चुनौतियां होंगी, लेकिन आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण के ठोस नतीजे देखने को मिलेंगे। साथ ही उन्होंने यमुना की सफाई और सड़कों के रखरखाव को लेकर सरकार की योजनाओं पर भरोसा जताया।



