लंबित मुद्दों पर अमित शाह से मिले सीएम भगवंत मान, बीज बिल, SYL और सीमावर्ती किसानों की समस्याएं उठाईं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात में सीएम मान ने उठाए पंजाब के अहम मुद्दे बीज बिल 2025, SYL विवाद और अनाज ढुलाई पर जताई गंभीर चिंता RDF बकाया, चंडीगढ़ प्रशासन और सीमावर्ती किसानों की समस्याएं प्रमुख

नई दिल्ली, 17 जनवरी 2026: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और पंजाब से संबंधित विभिन्न लंबित मुद्दों के जल्द और समयबद्ध समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सीमावर्ती सुरक्षा प्रबंध, कृषि संकट, अंतरराज्यीय जल विवाद और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण विकास फंड के बकाए की अदायगी में हो रही देरी जैसे अहम विषय शामिल रहे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती सुरक्षा दीवार के जीरो लाइन से काफी दूर होने के कारण किसानों को पेश आ रही परेशानियों पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा और कंटीली तार के बीच स्थित कृषि योग्य भूमि को लेकर चिंता जताई, जहां किसानों को रोजाना अपने खेतों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा जांच और कंटीली तार पार करनी पड़ती है।

 

बीज बिल 2025 पर पंजाब की आपत्ति

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रस्तावित बीज बिल 2025 पर गंभीर एतराज जताते हुए कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और देश के अन्न भंडार में अहम योगदान देता है, इसके बावजूद बिल के मौजूदा खाके में राज्य के प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि जोन आधारित सिस्टम के कारण केंद्रीय बीज समिति में पंजाब की भागीदारी की कोई गारंटी नहीं है, जिससे बीज क्षेत्र से जुड़े अहम फैसलों में राज्य की आवाज दब रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बीज रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में राज्य बीज समिति की कोई भूमिका तय नहीं की गई है और किसानों को नुकसान होने की स्थिति में मुआवजे के लिए कोई ठोस ढांचा भी प्रस्तावित नहीं है।

 

विदेशी बीज और किसानों के हित

मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि विदेशों में टेस्ट की गई बीज किस्मों को पंजाब और अन्य राज्यों में बिना स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार टेस्टिंग के बिक्री की अनुमति दी जा रही है, जिससे किसानों को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब की खेती प्रणाली में किसान अपनी फसल से बीज भी सुरक्षित रखते हैं और उन्हें पूरी तरह निजी कंपनियों पर निर्भर बनाना किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने अपील की कि बीज बिल को मौजूदा स्वरूप में संसद में पेश न किया जाए। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी बिंदुओं की जांच का भरोसा दिया।

 

SYL विवाद और जल बंटवारे पर रुख

नदियों के पानी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियों में पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है, ऐसे में सतलुज-यमुना लिंक नहर का निर्माण व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि इन नदियों के कुल 34.34 एमएएफ पानी में से पंजाब को केवल 14.22 एमएएफ आवंटित किया गया, जबकि शेष हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को दिया गया, जबकि इनमें से कोई भी नदी वास्तव में इन राज्यों से नहीं बहती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पंजाब के साथ अन्याय है और सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य का यही रुख है।

 

अनाज ढुलाई, भंडारण और आढ़तिया कमीशन

अनाज की ढुलाई और भंडारण की समस्या पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एफसीआई द्वारा ढुलाई बेहद धीमी गति से हो रही है, जिससे राज्य में भंडारण संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान 95 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी होनी है, जबकि वर्तमान में केवल 20 लाख मीट्रिक टन की ही जगह उपलब्ध है। उन्होंने अनाज ढुलाई के लिए विशेष रेलगाड़ियों की मांग की। साथ ही आढ़तिया कमीशन को 2019-20 से फ्रीज किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आढ़तिए एजेंट नहीं, बल्कि जरूरी सेवाएं प्रदान करने वाली अहम कड़ी हैं और उन्हें उनका बनता हक मिलना चाहिए।

 

RDF बकाया, चंडीगढ़ प्रशासन और सीमावर्ती मुद्दे

ग्रामीण विकास फंड की अदायगी न होने का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि RDF के 9030.91 करोड़ रुपये और मार्केट फीस के 2267.83 करोड़ रुपये अब भी लंबित हैं, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने साफ कहा कि RDF कोई चैरिटी नहीं बल्कि पंजाब का अधिकार है। इसके अलावा चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब-हरियाणा के 60:40 अनुपात को बनाए रखने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब कैडर के अधिकारियों को अहम पदों से दूर किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि कंटीली तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक किया जाए तो किसान बिना डर और पाबंदियों के खेती कर सकेंगे, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी कोई समझौता नहीं होगा।

 

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