बड़ी खबर: RSS और बीजेपी के बीच हुआ अंदरूनी समझौता, कुर्सी बची, पॉवर गई..

लेखक: विनीता यादव

बीजेपी और RSS के बीच लंबे समय से अंदरूनी तनाव चला आ रहा है। आधिकारिक तौर पर कभी कुछ सामने नहीं आया, लेकिन हालिया गतिविधियों और संकेतों से लगता है कि दोनों के बीच एक म्यूचुअल समझदारी बन चुकी है। यह कोई आधिकारिक समझौता नहीं है, लेकिन उनके कामकाज और निर्णयों से साफ दिखाई देता है कि दोनों अब संतुलित रूप से आगे बढ़ने का रास्ता चुन रहे हैं।

मोहन भागवत की शैली और संदेश

RSS प्रमुख मोहन भागवत की भाषण शैली हमेशा अलग रही है। वे सीधे किसी का नाम नहीं लेते, बल्कि संस्कृति, परंपरा, नैतिकता और राष्ट्र के विकास की बातें करते हुए सूक्ष्म संदेश देते हैं। कई बार ऐसा लगता है कि उनका संदेश सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए होता है, लेकिन इसे साबित करना मुश्किल है।

बीजेपी अध्यक्ष पद और JP नड्डा

बीजेपी अध्यक्ष पद कई सालों से लंबित है। जेपी नड्डा लगातार इस पद पर बने हुए हैं और पार्टी के अन्य कई अहम पद भी संभाल रहे हैं। हाल ही में RSS की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर मोदी ने दिल्ली में सिल्वर कॉइन जारी किया, जबकि भागवत ने नागपुर में कार्यक्रम आयोजित किया। इस समय नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।

मोदी का लंबा पेज लेख और समझौते का संकेत

मोदी ने अपने जन्मदिन से पहले मोहन भागवत पर पूरा पेज वाला लेख लिखा। यह लेख भी एक तरह का संदेश था कि दोनों के बीच मतभेद अब सुलझ चुके हैं। भागवत का जन्मदिन 11 सितंबर और मोदी का 17 सितंबर को आता है। इस समय और RSS की 100वीं वर्षगांठ की गतिविधियों ने देश के सामने यह संकेत दिया कि मोदी ने दबाव संभालते हुए स्थिति को स्थिर किया।

बीजेपी में बदलाव के संकेत

इस समझौते का असर बीजेपी में भी दिखाई दे रहा है। पार्टी ने संकेत दिया कि बीजेपी अध्यक्ष पद की घोषणा बिहार चुनाव के बाद की जाएगी, लेकिन गुजरात और उत्तर प्रदेश में नए अध्यक्षों की नियुक्ति की खबरें पहले ही आने लगी हैं। यह तेजी साफ दिखाती है कि दोनों पक्ष बिना विवाद के आगे बढ़ना चाहते हैं।

मोदी की कुर्सी सुरक्षित

इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि मोदी की प्रधानमंत्री कुर्सी सुरक्षित है। RSS ने इस कुर्सी पर किसी भी बदलाव के लिए विरोध नहीं किया। वहीं, अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों और पदों पर अब RSS की राय और अनुमति जरूरी मानी जा रही है।

RSS और BJP का भविष्य

यदि RSS अब बीजेपी के कई निर्णयों में पृष्ठभूमि से सक्रिय भूमिका निभा रही है, तो इसका मतलब है कि मोदी को भी कई मामलों में RSS की सहमति लेना पड़ सकता है। यह राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनावों में असर दिखा सकता है।

समझौता आधिकारिक नहीं

संक्षेप में कहा जाए तो यह समझौता आधिकारिक नहीं है, लेकिन साफ दिखाई देने वाला है। मोदी अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं, RSS ने कुछ अन्य पदों पर हरी झंडी दी है, और दोनों पक्ष अब एक-दूसरे के फायदे और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

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