Atishi Marlena की मांग: निष्कासित विधायकों को सदन में वापस बुलाया जाए
आतिशी ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र निष्कासित विधायकों की वापसी की उठाई मांग विपक्ष बोला लोकतांत्रिक परंपराओं का हो रहा उल्लंघन

नई दिल्ली, 22 मार्च 2026 आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Atishi Marlena ने रविवार को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर निष्कासित विधायकों को दोबारा सदन में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आठवीं विधानसभा के गठन के बाद अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से इस उम्मीद के साथ किया गया था कि सदन लोकतांत्रिक और विधि-सम्मत तरीके से चलेगा।
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर जोर
Atishi Marlena ने अपने पत्र में कहा कि विधानसभा केवल सरकार का मंच नहीं, बल्कि पक्ष और विपक्ष दोनों की भागीदारी से चलने वाला संस्थान है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का कर्तव्य है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के मुद्दों को सदन में मजबूती से रखे।
अध्यक्ष के रवैये पर उठाए सवाल
उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि पहले सत्र से लेकर चौथे सत्र तक अध्यक्ष का रवैया विपक्ष के प्रति चिंताजनक रहा है। पूरे विपक्ष को एक साथ सदन और परिसर से बाहर करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया गया।
इतिहास में अभूतपूर्व कदम
आतिशी ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता, जहां पूरे विपक्ष को एक साथ सदन और उसके परिसर से बाहर कर दिया गया हो। उन्होंने इसे सदन की मर्यादा के खिलाफ बताया।
जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन
उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को पूरे सत्र के दौरान परिसर में प्रवेश से रोकना उनके विशेषाधिकारों का हनन है। यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
सत्ता पक्ष पर भी लगाए आरोप
Atishi Marlena ने आरोप लगाया कि हालिया सत्र में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तीन दिन तक सदन नहीं चलने दिया, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विपक्ष के मुद्दे उठाने पर सख्त कार्रवाई की गई।
संवैधानिक अधिकारों में बाधा का आरोप
उन्होंने कहा कि विपक्षी विधायकों को समितियों की बैठकों में शामिल होने से भी रोका गया, जिससे वे अपने विधायी कार्य नहीं कर सके। इसे उन्होंने संवैधानिक अधिकारों में बाधा बताया।
विपक्ष की मांग क्या है?
अंत में Atishi Marlena ने मांग की कि सभी निष्कासित विधायकों को अगले सत्र में शामिल किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सदन निष्पक्ष रूप से चले और विपक्ष को जनहित के मुद्दे उठाने का पूरा अवसर मिले।



