AI पर हाई कोर्ट सख्त: जजों को ChatGPT-Gemini इस्तेमाल करने से रोका

AI पर कोर्ट सख्त, जजों को साफ निर्देश फैसले और रिसर्च में AI के इस्तेमाल पर रोक न्यायिक प्रक्रिया में इंसानी सोच को प्राथमिकता

Technology: स्मार्टफोन और इंटरनेट के दौर में जहां Artificial Intelligence का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, वहीं अब अदालतों ने इस पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। Punjab and Haryana High Court ने न्यायिक अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे फैसला लिखने या कानूनी रिसर्च के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल न करें।

 

न करें AI का इस्तेमाल

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सभी जिला और सत्र न्यायाधीश अपने अधीन काम करने वाले जजों को यह निर्देश दें कि वे ChatGPT, Google Gemini, Microsoft Copilot जैसे किसी भी AI प्लेटफॉर्म का उपयोग फैसले लिखने या कानूनी शोध के लिए न करें। आदेश में यह भी कहा गया है कि इस नियम का उल्लंघन गंभीर माना जाएगा।

 

गुजरात हाई कोर्ट पहले ही लगा चुका है रोक

इससे पहले Gujarat High Court भी AI के इस्तेमाल पर रोक लगा चुका है। वहां स्पष्ट किया गया था कि कोई भी जज निर्णय लेने, कानूनी तर्क तैयार करने, आदेश लिखने या जमानत जैसे मामलों में AI का सहारा नहीं ले सकता।

 

AI का इस्तेमाल कहां तक सही?

गुजरात हाई कोर्ट की नीति के मुताबिक, AI का इस्तेमाल केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज और बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह इंसानी सोच और कानूनी समझ की जगह नहीं ले सकता। साफ है कि अदालतें तकनीक के इस्तेमाल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन न्याय जैसे संवेदनशील मामलों में अंतिम फैसला इंसान के विवेक से ही लिया जाना जरूरी माना जा रहा है।

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