दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल का खौफनाक चेहरा: मामूली विवाद में मजदूर को उतारा मौत के घाट!
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का हेड कांस्टेबल बना 'कातिल', शोर मचाने पर मजदूर को बीच सड़क मारी गोली। खाकी पर लगा दाग: शराब के नशे और मामूली बहस ने ली एक की जान, आरोपी नीरज पुलिस की गिरफ्त से बाहर। द्वारका में आधी रात को खूनी खेल, रक्षक के हाथों हुई हत्या से दिल्ली पुलिस के इकबाल पर उठे गंभीर सवाल।

Delhi police: राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने खाकी को दागदार कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात एक हेड कांस्टेबल पर आरोप लगा है कि उसने आपा खोकर एक मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद से आरोपी पुलिसकर्मी फरार है और पुलिस की चुप्पी महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
देर रात पार्टी… और फिर गूंजी गोलियां
वारदात द्वारका के जाफरपुर कला इलाके की है। रविवार तड़के करीब 2 बजे जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब वहां गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दी। बताया जा रहा है कि इलाके में कुछ मजदूर देर रात पार्टी कर रहे थे। इसी दौरान स्पेशल सेल में तैनात हेड कांस्टेबल नीरज वहां पहुंचा। शोर-शराबे को लेकर मजदूरों और नीरज के बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि नीरज ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाल ली।
Delhi police: एक की मौत, दूसरा घायल
गुस्से में पागल हेड कांस्टेबल ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में एक मजदूर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक अन्य शख्स गंभीर रूप से घायल हो गया। सूत्रों की मानें तो विवाद शराब के नशे और शोर को लेकर हुआ था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आरोपी पुलिसकर्मी खुद भी नशे की हालत में था? पुलिस फिलहाल इस एंगल पर जांच कर रही है।
Delhi police: पुलिस की कार्रवाई: आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर
वारदात को अंजाम देने के बाद हेड कांस्टेबल नीरज मौके से रफूचक्कर हो गया। दिल्ली पुलिस ने अपने ही महकमे के इस सिपाही के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की टीमें जगह-जगह छापेमारी कर रही हैं, लेकिन नीरज का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी वारदातें
Delhi police: दिल्ली में पुलिसकर्मियों या रसूखदारों द्वारा फायरिंग की यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में करोल बाग इलाके में भी देर रात गोलियां चली थीं। सवाल यह उठता है कि क्या कानून का डर खत्म होता जा रहा है? आखिर स्पेशल सेल जैसा जिम्मेदार पद संभालने वाला शख्स इतना हिंसक कैसे हो गया?
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