AAP में महासंग्राम: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की बगावत, क्या रद्द होगी सदस्यता?

AAP ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखने का किया ऐलान दल-बदल कानून के तहत सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के फैसले से पंजाब की राजनीति गरम

Raghav chadhha: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे सियासी घमासान ने अब कानूनी और संवैधानिक मोड़ ले लिया है। राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के ऐलान के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज है। एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मोर्चा संभाला है, तो दूसरी तरफ संजय सिंह कानूनी दांवपेंच के जरिए बागी सांसदों को घेरने की तैयारी में हैं।

राष्ट्रपति से मिलेंगे भगवंत मान, ‘रिकॉल’ की तैयारी

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद हमलावर नजर आ रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। बताया जा रहा है कि मान पंजाब के विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों को रिकॉल (Recall) करने की मांग रखेंगे। उनका तर्क है कि जनता के जनादेश का अपमान करने वाले सांसदों को सदन में रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

Raghav chadhha: संजय सिंह का ‘एंटी-डिफेक्शन’ वार

इधर, पार्टी के कद्दावर नेता संजय सिंह ने बागी सांसदों के खिलाफ सीधे राज्यसभा सभापति का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। शनिवार को संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि: असंवैधानिक है फैसला: सांसदों का बीजेपी में जाना पूरी तरह ‘गैरकानूनी’ और ‘असंवैधानिक’ है। नहीं मिलेगी कानूनी मान्यता: दल-बदल विरोधी कानून के तहत राज्यसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन या अलग गुट को मान्यता नहीं दी जा सकती, चाहे बागी सांसदों की संख्या दो-तिहाई ही क्यों न हो। अयोग्यता की मांग: संजय सिंह उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर सातों सांसदों को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

Raghav chadhha: शुक्रवार को राघव चड्ढा और संदीप पाठक सहित सात सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया था। इनमें से तीन सांसद पहले ही भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। राघव चड्ढा का दावा है कि ‘आप’ के 10 में से 7 सांसद अब भाजपा में विलय के लिए तैयार हैं। News Nasha की नज़र: अब गेंद राज्यसभा सभापति और राष्ट्रपति के पाले में है। क्या संविधान की 10वीं अनुसूची इन सातों सांसदों की कुर्सी बचा पाएगी, या AAP की ये कानूनी घेराबंदी राघव चड्ढा और उनके साथियों पर भारी पड़ेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

 

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