दिल्ली ‘बाल तस्करी की मंडी’ बनती जा रही? हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली में बाल तस्करी पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी रेलवे, पुलिस और NCPCR को नोटिस जारी 6 साल में 84 हजार से ज्यादा बच्चों का रेस्क्यू

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी अब बाल तस्करी की “मंडी” बनती जा रही है। कोर्ट ने इस मामले में रेलवे, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से जवाब मांगा है। यह सुनवाई ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ की जनहित याचिका पर हुई, जिसमें रेलवे स्टेशनों और आसपास के इलाकों में बच्चों की तस्करी को लेकर चिंता जताई गई थी।

 

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि सच्चाई जानने के लिए किसी याचिका को पढ़ने की भी जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ रेलवे स्टेशनों के आसपास कुछ घंटे बिताने से ही स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। साथ ही, कोर्ट ने माना कि पहले दिए गए आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

 

आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

सुनवाई के दौरान बताया गया कि साल 2018 से 2024 के बीच रेलवे सुरक्षा बल ने रेलवे परिसरों से 84 हजार से ज्यादा बच्चों को बचाया है। इसके बावजूद तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो व्यवस्था की गंभीर कमी को दिखाती हैं।

 

चौंकाने वाला मामला सामने आया

एक हैरान करने वाली घटना में आनंद विहार रेलवे स्टेशन से बचाई गई एक बच्ची को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने के बजाय तस्करों को ही वापस सौंप दिया गया था। बाद में छापेमारी के दौरान उसे दोबारा रेस्क्यू किया गया, जिससे सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

 

अगली सुनवाई और निर्देश

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की है और NCPCR से इस मुद्दे पर ठोस सुझाव देने को कहा है, ताकि बाल तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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