ओडिशा के गंजाम में दिखा प्रकृति का अद्भुत नजारा: रुषिकुल्या तट पर 2 लाख ऑलिव रिडले कछुओं ने दिए अंडे
रुषिकुल्या तट पर 2 लाख कछुओं की नेस्टिंग मार्च में अंडे, मई में हैचिंग की संभावना वन विभाग ने बढ़ाई सुरक्षा और निगरानी

Odisha: ओडिशा के गंजाम जिले के रुषिकुल्या समुद्र तट पर एक बार फिर प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला है। 14 से 17 मार्च के बीच करीब 2 लाख ऑलिव रिडले मादा समुद्री कछुए समुद्र से निकलकर तट पर पहुंचीं और रेत में अंडे दिए। हर साल होने वाली इस खास प्रक्रिया पर वैज्ञानिकों और वन विभाग की नजर रहती है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, ऑलिव रिडले कछुओं का प्रजनन नवंबर से जनवरी के बीच समुद्र में होता है। इसके बाद मादा कछुए कुछ समय तक अंडों को अपने शरीर में सुरक्षित रखती हैं और सही समय आने पर फरवरी-मार्च में उसी तट पर लौटती हैं, जहां उनका जन्म हुआ था। यहां पहुंचकर वे अपने फ्लिपर्स से रेत में गड्ढा बनाती हैं और उसमें अंडे देकर उन्हें ढक देती हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ब्रह्मपुर फॉरेस्ट डिवीजन के डीएफओ सनी खोखर के मुताबिक, इस साल भी नेस्टिंग एरिया में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिन जगहों पर कछुओं ने अंडे दिए हैं, वहां लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है। समुद्र और तट दोनों जगहों पर बोट और टीम की निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि अंडों और कछुओं को कोई नुकसान न पहुंचे।
कैसे होती है काउंटिंग?
वन विभाग के अनुसार, हर साल तय एसओपी के तहत कछुओं की गिनती और क्षेत्र का सेगमेंटेशन किया जाता है। इससे सही आंकड़े जुटाने में मदद मिलती है और संरक्षण की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकती है।
कब निकलेंगे बच्चे?
जानकारी के मुताबिक, अंडों से बच्चों के बाहर आने में करीब 45 से 60 दिन का समय लगता है। ऐसे में इस साल मई महीने में हैचिंग होने की संभावना है। तब तक पूरे इलाके में सुरक्षा और निगरानी जारी रहेगी।
क्यों खास है रुषिकुल्या तट?
रुषिकुल्या समुद्र तट ऑलिव रिडले कछुओं के लिए एक अहम नेस्टिंग स्पॉट माना जाता है। हर साल यहां बड़ी संख्या में कछुओं का आना इस इलाके के पर्यावरणीय महत्व को दर्शाता है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस अनोखी प्राकृतिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने में जुटे हैं।



